एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि हमने पिछले सेमेस्टर की बची हुई परीक्षाओं को 27 जनवरी से फिर से कराने का निर्णय लिया। परंतु, कुछ दिग्भ्रमित लोग, जिनमें कुछ बाहरी तत्व भी शामिल हैं, इन परीक्षाओं को आयोजित नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने परीक्षा केन्द्रों, विभागों पर ताला डाल दिया है और छात्रों को परीक्षा में भाग लेने से रोक रहे हैं। ये तत्व अनेक छात्रों को धमकी भी दे रहे हैं। इनमें से कुछ ने 27 जनवरी को अजमल खां तिब्बिया कॉलेज जाकर परीक्षा दे रहे छात्रों से जबरदस्ती कॉपियां छीन लीं। बहुत से बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों, जिनमें से कुछ अपने अभिभावकों के साथ परीक्षा देने आए थे, उन्हें भी अराजक भीड़ ने परीक्षा में नहीं भाग लेने दिया। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व स्कूली छात्रों, जिनमें 10-12 साल के बच्चे भी शामिल हैं, उनकी भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। कुलपति ने कहा कि छात्रों को कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी विषय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की पूर्ण स्वतंत्रता है।
सभी मामले हमारा आंतरिक सुरक्षा तंत्र निपटाएगा : वीसी
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि मैंने अपने पिछले दो पत्रों द्वारा सभी छात्रों को सुरक्षा का विश्वास दिलाया है और एक बार फिर आपको विश्वास दिलाता हूं कि हम छात्रों से संबंधित मामलों की जांच या सुरक्षा के संबंध में स्वयं अपने प्रॉक्टोरियल स्टाफ तथा प्रो. प्रॉक्टर्स के सुरक्षा तंत्र पर निर्भर रहेंगे। अनुशासनहीनता पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। किसी भी बाहरी एजेंसी की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि मई 2018 तथा फरवरी 2019 में भी कुछ घटनाएं घटित हुई थीं। जिनको छात्रों, शिक्षकों तथा जिला प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया था। इसी प्रकार नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हाल में 11 दिसंबर 2019 से 14 दिसंबर 2019 के बीच भी कई शांतिपूर्ण धरने प्रदर्शन संचालित हुए हैं। 15 दिसंबर 2019 को विश्वविद्यालय में दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। छात्रों को पहुंचने वाली चोटों तथा शीतकालीन छुट्टियों की अचानक घोषणा के चलते कम समय में हास्टल छोड़ने में छात्रों को जो कठिनाइयां हुईं, उसके लिए खेद व्यक्त कर चुका हूं। यह निर्णय पूरी नेकनीयती से लिया गया था तथा इसका उद्देश्य किसी भी छात्र को कोई हानि पहुंचाना नहीं था।
उन्होंने कहा कि हमने छात्रों के विरुद्ध होने वाली एफआईआर, चोटिल छात्रों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति सहायता, पुलिस द्वारा उठवाई गई गाड़ियों से संबंधित मामलों की जांच और सहायता के लिए पहले ही दो कमेटियां गठित की हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन निर्दोष छात्रों की हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि यदि किसी को मुझसे कोई शिकायत है तो वह विश्वविद्यालय के विजिटर राष्ट्रपति को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि विश्वविद्यालय के किसी वर्ग को विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी से कोई शिकायत है तो वह मुझे लिखित रूप में अपनी शिकायत दे सकता है। उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। प्रो. मंसूर ने कहा कि कुलपति के रूप में ढाई वर्षों के अपने कार्यकाल में मैंने एएमयू बिरादरी के सभी वर्गों द्वारा विभिन्न विषयों पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रदर्शन की अनुमति दी है। एक लोकतांत्रिक शैक्षणिक संस्थान के रूप में यहां प्रत्येक को किसी भी विषय पर विचार करने, बहस करने और विचार रखने की अनुमति है।
मानवाधिकार आयोग जांच कर रहा है, इंतजार करें
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि 15 दिसंबर 2019 की घटनाओं की उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग जांच कर रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को निर्धारित है। हमें इसकी प्रतीक्षा करनी चाहिए। प्रो. मंसूर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस वीके गुप्ता के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित की है। जिसकी पहली बैठक 20 जनवरी 2020 को हो चुकी है।
बाधा पहुंचने वाले छात्रों को तुरंत रिहा कराया
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि कुछ लोगों ने गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने की कोशिश की, जो गंभीर अपराध है, क्योंकि गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व है और राजनीति से परे है। इन तत्वों को विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल स्टाफ ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। क्योंकि वे इन लोगों की शिनाख्त के बारे में स्पष्ट नहीं थे। इन लोगों को पुलिस के हवाले किए जाने के संबंध में जानकारी नहीं थी। जैसे ही परीक्षा कंट्रोलर से इनमें से तीन के छात्र होने की सूचना मिली, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला प्रशासन से इन छात्रों को रिहा करने का आग्रह किया। इसके बाद में तीन छात्रों को कुछ घंटों के अंदर रिहा कर दिया गया। चौथा व्यक्ति जो विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है, उसे भी जिला प्रशासन ने अगले दिन रिहा कर दिया।