भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव कामरेड इकबाल मंद ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि भारत को चीन से सीखना चाहिए। चीन की ही तरह एक दंपती, एक संतान की नीति को अपनाना चाहिए। भारत में जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को नाकाम करने में जाति-धर्म के नाम पर अपनी रोटी सेंकने वाले स्वयंभू ठेकेदारों और राजनीतिक दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। भारत के लिए गरीबी-बेरोजगारी ही नहीं, इससे उपजी कुपोषण जैसी समस्याओं से पार पाना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
इकबाल मंद ने कहा कि कारगर नीतियों से चीन को रोजगार, भोजन, शिक्षा और चिकित्सा पर समुचित ध्यान देने का अवसर मिला। लिंग भेद पर अंकुश लगा। वहां एक बच्चे की परवरिश आसानी से कर पाने की वजह से पारिवारिक स्तर में भौतिक-आर्थिक बदलाव हुए। भारत में जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों का दुखद परिणाम है कि सदी के अंत तक पहुंचते-पहुंचते भारत की आबादी का आंकड़ा 150 करोड़ को पार कर जाएगा। हमारे देश की आबादी अभी एक अरब 35 करोड़ के आसपास है। बढ़ती आबादी का संकट भारत के लिए भयावह चुनौती है। वैज्ञानिक एक दशक पहले से चेतावनी दे रहे है कि भारत जनसंख्या विस्फोट और प्राकृतिक संसाधनों की खपत को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। सरकार को इस विषय में विचार कर प्रभावी कदम बढ़ाने चाहिए।