नगर निकाय चुनाव की मतगणना के परिणाम ने सबको चौंकाया है। टिकट वितरण के बाद बदले समीकरण में कुछ उम्मीदवारों ने बागी बनकर चुनाव लड़ा। उन्हें रोकने का बहुत प्रयास हुआ लेकिन सफलता नहीं मिली। जब मुकाबला हुआ तो राजनीतिक दलों के लिए बागी ही सबसे बड़ा सिरदर्द बन गए। जिसके फलस्वरूप चुनाव में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। नगर निगम समेत 18 निकायों में से सिर्फ आठ पर ही भाजपा अपना परचम लहरा सकी है। सात सीटों पर निर्दलीय एवं बागी उम्मीदवारों ने अपनी विजय पताका फहराई। बसपा एवं आम आदमी पार्टी भी एक-एक सीट जीतने में सफल रही है।
निर्दलीय एवं बागी बनकर चुनाव मैदान में उतरे कई प्रत्याशियों न केवल तख्ता पलट कर पार्टी प्रत्याशियों को करारी हार स्वीकार करने को मजबूर कर दिया तो दलों को बराबर की टक्कर देने का भी काम किया है। अगर हम जिले में नगर निगम को छोड़कर नगर पालिका खैर की बात करें तो यहां भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज पार्टी नेता अन्नू आजाद ने न केवल चुनाव से पहले ही पार्टी को अलविदा कर दिया बल्कि बागी प्रत्याशी के रूप में अपनी पत्नी ज्योति शर्मा को खैर नगर पालिका से चुनाव मैदान में उतार दिया। हालांकि भले ही वे चुनाव में कोई करिश्मा नहीं दिखा सके, लेकिन उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतरे पुरुषोत्तम गर्ग की राह जरुर रोक दी। इससे आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी संजय शर्मा की जीत पक्की कर दी।
निकाय चुनाव की मतगणना के बाद साफ हुआ है कि जिले में कई दिग्गज अपने वार्ड में पार्टी प्रत्याशी को ही नहीं जिता सके हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर जीत के बाद भाजपा की साख को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा के दिग्गजों के क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी की जीत पार्टी के अलावा विरोधी दलों के बीच भी चर्चा का विषय बन रही है।
बीजेपी प्रत्याशी की हार ने किया हैरान
जिले में नगर निगम के बाद सबसे हॉट सीट गभाना नगर पंचायत थी। इस सीट पर जीत-हार पर सबकी निगाहें लगी हुई थीं। यहां भाजपा के पूर्व विधायक ठा. दलवीर सिंह एवं सांसद सतीश गौतम की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। मैदान में भाजपा ने ठा. दलवीर सिंह की पुत्रवधु एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख पुष्पलता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा गया था। इसी सीट से भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार एवं गभाना राजघराने के कुंवर अभिमन्यु राज सिंह ने टिकट मांगी थी, लेकिन टिकट कटने से नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 2300 से अधिक मतों से भाजपा प्रत्याशी पुष्पलता को हरा दिया। नगर निगम में पार्षद सीट पर भाजपा के खिलाफ बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव में खड़े हुए कार्यकर्ताओं ने पार्टी की हार- जीत के आंकड़ों को प्रभावित किया है। भाजपा के विरोधी दलों के प्रत्याशियों को इसका फायदा हुआ है।