इस विषय में कोई खुलकर तो नहीं बोल रहा। मगर प्रदेश नेतृत्व के स्तर से इस घटना को गंभीरता से लिए जाने की जानकारी मिल रही है। पार्टी सूत्रों के स्तर से पता चल रहा है कि इस विषय में जल्द कोई निर्णय लिया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बाद जिले के जनप्रतिनिधियों के स्तर से भी अलग-अलग राय नेतृत्व को दी जा रही है। साथ में इस प्रकरण में शामिल लोगों के पुराने घटनाक्रमों को भी नेतृत्व तक भेजा जा रहा है। इसी दिशा में दूसरा पक्ष सांसद के वापस आने का इंतजार कर रहा है। उनके वापस आने पर अपनी बात शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही जा रही है।
सिफारिशों से एक जगह रहते हैं गनर
अलीगढ़ जिले में आधा दर्जन ऐसे माननीय हैं, जिनके गनर लंबे समय से उनके साथ हैं। उनके तबादले या बदलने पर माननीयों के स्तर से अधिकारियों तक सिफारिश की जाती है। जिसे इस तरह जोड़कर देखा जा रहा है कि कई बार ऐसे गनर माननीयों व राजनेताओं के बेहद करीब हो जाते हैं। उनके साथ होने वाली घटनाओं पर खुलकर विरोध करते हैं। इस घटना में भी गनर अनूप पर दूसरा पक्ष कारबाइन तानने का आरोप लगा रहा है। व्यावहारिक पक्ष पर पुलिस नियमावली के जानकार यही कहते हैं कि भीड़ में महानगर अध्यक्ष के साथ धक्कामुक्की में अगर कोई बड़ी घटना हो जाती तो गनर पर ही सवाल खड़े होते। उसने कारबाइन तानी थी या कारबाइन बचाने का प्रयास किया था। ये जांच का विषय है।