अवैध निर्माण ध्वस्त करतीं जेसीबी मशीन
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प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन के प्रमुख दीपक कुमार ने सोमवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विकास प्राधिकरणों के सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। तय हुआ कि विकास प्राधिकरण, आवास विकास और अन्य विभागों की कॉलोनियों में होने वाले अवैध निर्माण, शहरी इलाकों में होने वाले अवैध निर्माण को सेटेलाइट इमेजरी सिस्टम से पहचाना जाएगा।
सेटेलाइट से इसकी इमेज बनेगी और फिर उस पर कार्रवाई होगी। मसलन एक इलाके में आज कोई प्लाट खाली है और छह महीने बाद वहां कोई निर्माण कार्य हो गया है। इसको सेटेलाइट से खींचे गए फोटो से पकड़ा जाएगा। अगर ये निर्माण नक्शा पास कराने के बाद हुआ तो कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगर नक्शा नहीं बना है तो उस पर जुर्माने के साथ नक्शा शुल्क आदि वसूला जाएगा।
बैठक में शामिल हुए अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव डीएस भदौरिया ने बताया कि उक्त फैसले के साथ ही ये भी प्रस्ताव रखा गया है कि आवासीय इलाके में व्यवसायिक निर्माण करने वालों पर भी जुर्माना होगा। इसके अलावा बिजली, नगर निगम, डूडा और रजिस्ट्री कार्यालय से सहयोग लिया जाएगा। जिससे अवैध निर्माण रोकने में मदद मिले। इसके लिए शासन स्तर से जल्द ही नए दिशा निर्देश जारी होंगे।
गौर हो कि अमर उजाला के 25 नवंबर सोमवार के अंक में ही अवैध निर्माण की गंभीर समस्या को ‘21 महीने में ध्वस्तीकरण के 50 आदेश केवल दो ढहाये, चल रहे अवैध निर्माण’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसमें लखनऊ की इस बैठक का भी जिक्र शामिल था। एडीए ने हाल ही में शहर में 5 हजार अवैध निर्माण चिन्हित किए हैं, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
नोटिस और सीलिंग से आगे नहीं बढ़ पा रहा एडीए
वित्तीय वर्ष 2018-19
चिन्हित अवैध निर्माण 413
शमनित अवैध निर्माण 66
सीलिंग आदेश 120
सील किए अवैध निर्माण 49
ध्वस्तीकरण के आदेश 34
ध्वस्त अवैध निर्माण 0
अभियोजन आदेश 36
शमन के सापेक्ष धनराशि 6 करोड़ 93 लाख 21 हजार 446
वित्तीय वर्ष 2019-20 में 20 नवंबर तक
चिन्हित अवैध निर्माण 287
शमनित अवैध निर्माण 59
सीलिंग आदेश 110
सील किए अवैध निर्माण 54
ध्वस्तीकरण के आदेश 16
ध्वस्त अवैध निर्माण 02
अभियोजन आदेश 58
शमन के सापेक्ष धनराशि 8 करोड़ 19 लाख 6 हजार 172