बिना सर्वे और निगरानी के कराए जा रहे काम
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर एमएम बेग कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर जो भी काम हो रहे हैं, उनका न तो पहले से सर्वे कराया जा रहा है, न निर्माण के समय में निगरानी हो रही है। यही अनदेखी हादसों का कारण बन रही हैं। आज एक जेई से उसके इलाके की सड़कों के बारे में पूछ लिया जाए तो वह सही से नाम नहीं बता पाएगा, उसकी लोकेशन बताना तो दूर की बात है। यह अपने आप में अनदेखी है।
पूर्व मेयर बोले-ठेकेदार और अधिकारी जवाबदेह
दो बार मेयर रहे आशुतोष वार्ष्णेय कहते हैं कि इस मामले में सीधे संबंधित अधिकारी और ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। ऐसा नहीं कि निर्माण पहले नहीं हुए। नालों से लेकर पेयजल या सीवर के लिए गड्ढे पहले नहीं खोदे गए, मगर इस तरह की लापरवाही कभी सामने नहीं आई। भवन निर्माण से लेकर सड़क निर्माण व गड्ढा खोदाई के नियम होते हैं। इस मामले में सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। अब तो तकनीक इतनी मजबूत हो गई हैं, उनके अनुसार काम करना चाहिये।
सुरक्षा संहिता के अनुसार खोदाई के नियम
- कहीं भी खुले इलाके में गड्ढा खोदते समय सीढ़ीनुमा ढलान बनाया जाता है।
- संकरे क्षेत्र में गड्ढा खोदते समय किनारों पर लकड़ी या टिन से सपोर्ट बनाते हैं।
- डेढ़ मीटर से अधिक किसी भी खोदाई पर किनारों पर सुरक्षा का ध्यान देना जरूरी।
- सभी मामलों में निर्माण संबंधी प्रभारियों को निरीक्षण के बाद प्रमाणित करना होता है।