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रेलवे रोड हादसा: सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी से गई मजदूर की जान, बिना सर्वे-निगरानी के कराए जा रहे काम

Mon, 27 Apr 2026 04:19 PM IST
Chaman Kumar Sharma अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर एमएम बेग कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर जो भी काम हो रहे हैं, उनका न तो पहले से सर्वे कराया जा रहा है, न निर्माण के समय में निगरानी हो रही है। यही अनदेखी हादसों का कारण बन रही हैं।
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खोदाई के दौरान ढाय गिरने से दबे मजदूर महेंद्र सिंह की मौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अलीगढ़ के रेलवे रोड पर पाइप लाइन के लिए गड्ढा खोदाई के दौरान मानकों की अनदेखी ही मजदूर महेंद्र सिंह की मौत का कारण बनी। मानकों का पालन किया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता। यह कहना है निर्माण कार्यों से जुड़े विशेषज्ञों का। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कार्यों के लिए भारतीय मानकों की पूरी सुरक्षा संहिता है, जिसका पालन किया जाना चाहिए।

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इस कार्य से जुड़े अधिकारी दावा कर रहे हैं कि नियमों और मानकों के अनुरूप कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन हादसे का वायरल वीडियो और मौके की तस्वीरें और विशेषज्ञ इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। शहर के प्रमुख आर्किटेक्ट इंजीनियर दीपक शर्मा कहते हैं कि जीआई सर्वे के जरिये किसी भी भवन या सड़क के नीचे की जानकारी की जा सकती है। सरकारी विभाग सर्वे में इस तरह का प्रयोग करते हैं, फिर यहां गड्ढा खोदते समय जमीन की कमजोरी का पता क्यों नहीं लगाया गया? भवन निर्माण में गड्ढा खोदने के अपने मानक होते हैं। उन मानकों का यहां ध्यान नहीं रखा गया। ऐसा ही सड़क निर्माण में भी हो रहा है। गड्ढे खोदे जा रहे हैं, उन जगहों को कवर नहीं किया जा रहा, सिर्फ टेप टांग दी जाती है। उनका कहना है कि एनबीसी (नेशनल बिल्डिंग कोड) के अनुसार सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाए, जिससे मजदूर व आम राहगीर दोनों सुरक्षित रह सकते हैं।

रेलवे रोड पर तय मानकों के अनुसार ही काम कराया जा रहा है। शनिवार को भी हमारी टीम की निगरानी में काम हो रहा था। कहीं भी किसी तरह की अनदेखी अथवा लापरवाही नहीं बरती जा रही है। शनिवार को हुआ हादसा महज एक इत्तफाक है। -पीके सिंह, महाप्रबंधक जलकल।
शनिवार को रेलवे रोड पर हुई दुखद घटना के मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि किस स्तर पर लापरवाही हुई है। इसमें जो भी दोषी मिलेगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी। रेलवे रोड पर क्षतिग्रस्त पेयजल पाइप लाइनों को ठीक करने का काम जारी है। संभावना है कि सोमवार तक पेयजल आपूर्ति को पूरी तरह से बहाल कर दिया जाएगा।- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त

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बिना सर्वे और निगरानी के कराए जा रहे काम
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर एमएम बेग कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर जो भी काम हो रहे हैं, उनका न तो पहले से सर्वे कराया जा रहा है, न निर्माण के समय में निगरानी हो रही है। यही अनदेखी हादसों का कारण बन रही हैं। आज एक जेई से उसके इलाके की सड़कों के बारे में पूछ लिया जाए तो वह सही से नाम नहीं बता पाएगा, उसकी लोकेशन बताना तो दूर की बात है। यह अपने आप में अनदेखी है।

पूर्व मेयर बोले-ठेकेदार और अधिकारी जवाबदेह
दो बार मेयर रहे आशुतोष वार्ष्णेय कहते हैं कि इस मामले में सीधे संबंधित अधिकारी और ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। ऐसा नहीं कि निर्माण पहले नहीं हुए। नालों से लेकर पेयजल या सीवर के लिए गड्ढे पहले नहीं खोदे गए, मगर इस तरह की लापरवाही कभी सामने नहीं आई। भवन निर्माण से लेकर सड़क निर्माण व गड्ढा खोदाई के नियम होते हैं। इस मामले में सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। अब तो तकनीक इतनी मजबूत हो गई हैं, उनके अनुसार काम करना चाहिये।

सुरक्षा संहिता के अनुसार खोदाई के नियम
  • कहीं भी खुले इलाके में गड्ढा खोदते समय सीढ़ीनुमा ढलान बनाया जाता है।
  • संकरे क्षेत्र में गड्ढा खोदते समय किनारों पर लकड़ी या टिन से सपोर्ट बनाते हैं।
  • डेढ़ मीटर से अधिक किसी भी खोदाई पर किनारों पर सुरक्षा का ध्यान देना जरूरी।
  • सभी मामलों में निर्माण संबंधी प्रभारियों को निरीक्षण के बाद प्रमाणित करना होता है।
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