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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर छाया विधायक-एसओ में मारपीट का मामला

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गोंडा थाने में इगलास के भाजपा विधायक राजकुमार सहयोगी व थानाध्यक्ष अनुज सैनी के बीच हुई मारपीट का मामला सोशल मीडिया पर छाया रहा। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, अखिलेश यादव, आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने ट्वीट कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मायावती ने सपा को भी कटघरे में खड़ा किया।
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पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने ट्वीट में कहा कि यूपी में अब कानून व्यवस्था दम तोड़ रही है। अलीगढ़ में भाजपा विधायक व पुलिस द्वारा एक-दूसरे पर लगाया गया आरोप व मारपीट अति गंभीर व काफी चिंताजनक है, जो भी दोषी हों, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामले में सपा-भाजपा की सरकार में भला फिर क्या अंतर रह गया है। सरकार इस पर समुचित ध्यान दे। पूर्व मुख्यमंत्री व सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले में योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में प्रदेश का यह हाल है, स्वयं भाजपा के ही विधायक पुलिस के द्वारा मारपीट का शिकार होने का आरोप लगा रहे हैं।
अमिताभ ठाकुर ने की पुलिस के न्याय की मांग
आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने थाना गोंडा हुई घटना में पुलिस वालों के साथ न्याय किए जाने की मांग की है। उन्होंने डीजीपी एचसी अवस्थी, जांच अधिकारी आईजी दीपक रतन सहित अन्य अधिकारियों को ईमेल व ट्वीट किए हैं।
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अमिताभ ने कहा कि इस घटना से संबंधित एक विडियो में इगलास विधायक का कुर्ता बिल्कुल ठीक लग रहा है। इस विडियो में थानाध्यक्ष बार-बार अपने साथ हुई पिटाई की बात कह रहे हैं और विधायक उसे मना नहीं कर रहे, जिससे दिखता है कि थानाध्यक्ष की बात सही है। एक अन्य वीडियो में थाने के चौकीदार साफ तौर पर कह रहे हैं कि विधायक ने उन्हें गंदी गाली दी, जिसपर थानाध्यक्ष ने प्रतिवाद किया। इस पर विधायक ने थानाध्यक्ष से मारपीट की। अमिताभ ने अनुसार, चौकीदार की बात से साफ दिखता है कि वे झूठ नहीं बोल रहे हैं। इसलिए अमिताभ ने इस मामले में सभी पक्षों के तथ्य जान कर सच्चाई सामने लाने तथा न्यायसंगत कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है, ताकि पुलिसवालों के साथ भी अन्याय नहीं हो।
अपमान झेलना, आत्मग्लानि का सबब: रक्षपाल
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने तीन साल के भाजपा शासन काल में हुए कई अवांछनीय गंभीर विवादों की पृष्ठभूमि में योगी सरकार की प्रदेश के पुलिस-प्रशासन के प्रति विश्वसनीयता-उदारता की नीति व भाजपा जनप्रतिनिधि-संगठन पदाधिकारियों के प्रति बेहद बेरुखी के भाव को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि 50 साल के राजनीतिक, सामाजिक शैक्षिक जीवन में उत्तर प्रदेश में कई सरकारें देखी हैं, लेकिन विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के प्रति पुलिस-प्रशासन अधिकारियों का इतना उपेक्षाभाव कभी महसूस नहीं किया। यह उपेक्षाभाव सहन करना विपक्षी दलों के पदाधिकारियों की तो मजबूरी है, लेकिन भाजपा के पदाधिकारियों के लिए तो आए दिन ऐसे अपमानों को झेलना निश्चित तौर पर आत्मग्लानि का सबब है।
इगलास विधायक पर कार्रवाई होनी चाहिए: नाजिम
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन के युवा प्रदेश महासचिव सैयद नाजिम अली ने भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि थाने में बुजुर्ग चौकीदार के साथ गाली गलौज और वर्दी पहने थानाध्यक्ष पिटाई करने वाले विधायक पर कार्रवाई होनी चाहिए। थाने में हंगामा काटने वाले विधायक द्वारा किए गए गलत काम में जिस तरीके से भाजपा सांसद और भाजपा विधायकों ने थाने में सैकड़ों लोगों को जमा कर पुलिस पर दबाव बनाकर एसओ को निलंबित व एसपी देहात को हटवाया है, उससे पुलिस का मनोबल टूटेगा।
पुलिसकर्मियों को बहाल नहीं किया गया तो होगा आंदोलन
भागीरथ सेना के प्रदेश महासचिव व समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव राजेश सैनी ने कहा कि घटना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि घटना का संज्ञान भागीरथ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनू सैनी सुदर्शन व प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी एडवोकेट ने लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग अलीगढ़ जिले में सैनी समाज के एक थानाध्यक्ष को नहीं पचा पा रहे हैं, जबकि सैनी समाज देश व प्रदेश में भाजपा को सर्वाधिक मतदान करने का काम बिना शर्त करते आ रहा है। प्रदेश अध्यक्ष ने एलान कर दिया है कि यदि सरकार ने अनुज सैनी व उनके अन्य दो साथियों को बिना शर्त बहाल नहीं किया तो निश्चित तौर पर सरकार को समझना चाहिए कि भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। तीन दिन के अंदर अगर निर्दोष तीनों पुलिसकर्मियों की बहाली सरकार द्वारा नहीं की गई तब भागीरथ सेना आंदोलन की रणनीति क्षेत्रवार तैयार करने में जुटेगी। प्रदेश महासचिव राजेश सैनी ने कहा कि आंदोलन की रणनीति का केंद्र बिंदु लखनऊ, अलीगढ़, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर आदि जनपदों में पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को बुलाकर बैठकों का दौर शुरू कर दिया जाएगा।
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