गांव शाहगढ़ के वीरेश कुमार को 25 नवंबर सुबह सड़क किनारे नवजात पड़ा मिला था। वह उसे अपने घर ले गए। नवजात मिलने की खबर पर कई निसंतान दंपती उसे अपनाने के लिए आ गए। सूचना पर 26 नवंबर को गांव में पुलिस पहुंच गई।
कहते हैं कि मां की ममता निष्ठुर नहीं होती, लेकिन उसकी कोई मजबूरी रही होगी, नौ माह तक अपने गर्भ में पाला और जन्म देते ही सड़क पर लावारिस छोड़ दिया। आज इस मासूम को अपनाने के लिए कई हाथ आगे बढ़े हैं और कई मां उसे अपने आंचल की छांव देने के लिए तैयार है।
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गांव शाहगढ़ के वीरेश कुमार को 25 नवंबर सुबह सड़क किनारे नवजात पड़ा मिला था। वह उसे अपने घर ले गए। नवजात मिलने की खबर पर कई निसंतान दंपती उसे अपनाने के लिए आ गए। सूचना पर 26 नवंबर को गांव में पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने लोगों को समझाया कि नवजात शिशु को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया होती है।
उसके बाद पुलिस ने उसे जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बार्न केयर यूनिट) भेज दिया था। 27 नवंबर को कई दंपती जिला महिला अस्पताल भी पहुंच गए। थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बुधवार को भी कुछ निसंतान दंपती जिला महिला अस्पताल में नवजात को लेने पहुंचे थे। उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया।