फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विभिन्नता में एकता ही भारतीय राष्ट्रवाद की पहचान : प्रणब

Wed, 18 Oct 2017 01:06 AM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला, अलीगढ़।
विज्ञापन
विभिन्नता में एकता ही भारतीय राष्ट्रवाद की पहचान : प्रणब - फोटो : Dig Vishal
विज्ञापन
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि विभिन्नता में एकता ही भारतीय राष्ट्रवाद की पहचान है। यूरोपीय और भारतीय राष्ट्रवाद में अंतर है। यहां एक राष्ट्र एक ध्वज की अवधारणा है। इसके अंदर विभिन्न धर्म, भाषाएं, संस्कृति और परंपराएं आती हैं। उन्होंने कहा कि अपने यहां आईआईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थान हैं, लेकिन हमें नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा के उन्नयन के लिए प्रणब ने विद्यार्थियों को शोध कार्यों में भी रुचि लेने की सलाह दी।
विज्ञापन


पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मंगलवार को एएमयू के एथलेटिक्स ग्राउंड में सर सैयद अहमद खान के द्विशतीय जन्म समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एएमयू सार्वभौमिक एवं बहुलतावादी सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं तथा क्षेत्रों के छात्र एवं शिक्षक एकसाथ मिलकर रहते हैं।

साथ ही वे सहकारिता तथा सहयोग की उच्च परंपरा के अंतर्गत देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। इससे पूर्व प्रणब मुखर्जी वीसी लॉज से परंपरागत बग्घी से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान एक महान विचारक एवं आधुनिक विज्ञान शिक्षा के प्रचारक थे। उन्होंने अपनी दूरदृष्टि से भारत की उपनिवेशवाद से ग्रस्त सामाजिक पृष्ठभूमि को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों से अलंकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विज्ञापन


सर सैयद ने विद्यालयों की स्थापना तथा पत्रिकाओं द्वारा पश्चिमी शिक्षा के महत्वपूर्ण तत्वों को वैज्ञानिक शिक्षा के संदर्भ में बढ़ावा देने के लिए प्रयत्न किया। शिक्षा के विकास को अपना मिशन बनाया। वर्तमान में हमें सर सैयद के मिशन के आधारभूत तत्वों पर गहन विचार करके उच्च स्तरीय शोध, सृजनात्मक शक्तियों तथा ज्ञान पर आधारित समाज के विकास के लिए कार्य करना होगा, क्योंकि यही इस देश को श्रेष्ठतम देशों की शृंखला में खड़ा करने का एकमात्र माध्यम है। 

उन्होंने आईआईटी व एनआईटी से पास होने वालों छात्रों के बारे में कहा कि उनको दुनिया की अच्छी कंपनियों में प्लेसमेंट मिलता है। लेकिन समाज में भी उन्हें सहभागिता करनी चाहिए। इकोनॉमिक्स, फिजिक्स एवं केमिस्ट्री से ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट करने वालों को रिसर्च में आगे आना चाहिए। बेसिक रिसर्च में काम करने की जरूरत है। सीवी रमन जैसे वैज्ञानिकों ने रिसर्च के क्षेत्र में काम किया और नोबल पुरस्कार तक पहुंचे। लेकिन अब आईआईटी व अन्य क्षेत्रों से निकलने वाले नोबल पुरस्कार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। 

एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि सर सैयद एक मसीहा थे, जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता तथा अपने विचारों की व्यापकता से इस महान देश में वैज्ञानिक विचारधारा एवं धर्म निरपेक्षता की परंपरा को प्रबल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस मौके पर अमेरिका के प्रख्यात इतिहासकार प्रो. डेविड लेलीवेल्ड को अंतरराष्ट्रीय तथा जस्टिस सुहैल एजाज सिद्दीकी को राष्ट्रीय स्तर के सर सैयद एक्सीलेंस अवार्ड 2017 से सम्मानित किया गया। प्रो. डेविड की अनुपस्थिति में उनकी ओर से प्रो. शाफे किदवई ने अवार्ड प्राप्त किया।

शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए एएमयू के केमिस्ट्री विभाग के प्रो. मोहम्मद मुनीर को विशेष इनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय सर सैयद निबंध प्रतियोगिता के प्रथम तीन विजेताओं चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पटना के राज वर्द्धन तिवारी, एएमयू के कैफ सिद्दीकी एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर की अनुषा पिल्लै को पुरस्कृत किया गया। समारोह में सर सैयद के जीवन एवं कार्यों पर आधारित विशेष काफी टेबिल बुक का विमोचन किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें