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बकरा, बोटा और छुरी की दुकानों पर ग्राहक कम

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बकरीद को लेकर क्वार्सी चौराहे पर बकरे बेचता व्यापारी। - फोटो : CITY OFFICE
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बकरीद से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को बकरे, बोटा और छुरी का बाजार बहुत गरम नहीं था। दुकानदार और ग्राहक दोनों बाजार में थे, लेकिन वो चुस्ती फुर्ती नहीं दिखी जिसके लिए ये त्योहार जाना जाता है। मुस्लिम इलाकों में कई जगहों पर कुर्बानी में हिस्सेदार बनने के बैनर भी लहराते दिखे, लेकिन यहां भी भीड़ कम थी। सर्वाधिक भीड़ ऊपरकोट, घास की मंडी, जामा मस्जिद, रेलवे रोड इलाके में थी। यहां कपड़ों, किराना, सूतफेनी, टोपी, कुर्ता पायजामा, कास्मेटिक, मेहंदी, जनरल स्टोर की दुकानों में लोगों ने जरूरी सामान खरीदा। दूध, फल और सब्जी भी खरीदे गए।
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मैंने पांच बकरे तैयार किए थे। सोचा था कि इनके बिकने से हमारा पूरा परिवार अच्छा त्योहार मनाएगा, लेकिन दोपहर बाद तक ग्राहक नहीं आने से मायूसी हुई है। उम्मीद है कि शाम तक कुछ अच्छा हो जाए। लोगों के पास काम धंधा बंद होने से पैसों की बहुत किल्लत है।
-नसीरुद्दीन, जीवनगढ़।
मैं ऊपरकोट से लेकर क्वार्सी जीवनगढ़ तक पूरा बाजार घूमा। ऊपरकोट रेलवे रोड में भीड़ है। बाकी जगहों पर कम लोग निकले हैं। कारण ये है कि महंगाई बहुत ज्यादा है और लोगों ने खरीददारी बहुत कम की है। बकरों का बाजार भी कुछ धीमा रहा है। मैं खुद अपने लिए भी बकरा ढूंढ रहा हूं।
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-अरशद अहमद, जोहरा बाग।
इस बार बबूल की लकड़ी का बोटा 15 रुपये किलो है। अगर एक बेहतर बोटा लेना है तो उसका वजन सात किलो तक होना चाहिए। इस तरह से इसकी कीमत 105 से 120 रुपये तक होती है। इस तरह से बेहतर चाकू, छुरी के दाम भी 120 रुपये से लेकर 450 और 550 रुपये तक रहे हैं। इस बार ग्राहक बहुत कम आए हैं। पहली बार ईद बकरीद में इतना सन्नाटा देखा है।
-सुलेमान सैफी लुहार।
बकरे लेकर आए थे। बहुत सस्ते थे। 10-10 हजार के बकरे भी बड़ी मुश्किल से बिके हैं। इससे पहले के सालों में बकरे हाथों हाथ बिक जाते हैं। कभी त्योहार से एक दिन पहले दम मारने की फुर्सत नहीं मिलती थी। चार पांच बकरे लेकर आए थे, दोपहर बाद तक भी ग्राहक नहीं आए हैं। जो आए वो रेट सुनकर चलते बने।
-मो. मुश्ताक निवासी हरदुआगंज।
महंगाई बहुत ज्यादा होने, लोगों का काम धंधा बंद होने, लॉकडाउन होने के कारण बकरीद में वो मजेदारी नहीं रही जैसे पहले रहती थी। अब केवल नाम के लिए त्योहार रह गया है। लोग रस्म अदायगी कर रहे हैं। पहले एक ही परिवार में पांच से छह कुर्बानी होती थी, अब पूरा परिवार एक कुर्बानी में आ गया है। इसलिए बकरों की मांग कम रही। पांच बकरे लेकर आए अभी दोपहर बाद तक ग्राहक नहीं मिले हैं।
मो. राशिद निवासी हरदुआगंज।
बकरीद तो यकीनन मनाई ही जाएगी। बकरे भी बिक रहे हैं। लकड़ी का बोटा और छुरी भी बिक रही है । इस बार ग्राहक कम हैं। शाम तक और अभी दो दिन तक कुर्बानी का सामान बिकता रहेगा। हमें सोमवार तक बेहतर होने की उम्मीद है।
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मो. आरिफ, निवासी जीवनगढ़।
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