पांच साल की ‘मट्टको’ किस्मत की धनी है। महानगर निवासी अधिवक्ता परिवार के लिए यह जान से ज्यादा प्यारी है। जी, मैं बात कर रहा हूं पर्शियन बिल्ली मट्टको की।
सर सैयद नगर निवासी अधिवक्ता हिसाम के घर में इस बिल्ली की हैसियत किसी बच्चे से कम नहीं है। परिवार के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यह आंखों का तारा है। मट्टको बेहद खूबसूरत है। एकदम टैडी बियर की तरह। मखमली बाल और बड़ी आंखें अनायास ही अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
जर्मन शेफर्ड को गुर्राता देखकर मट्टको को टोकरी में छिपा लिया
अधिवक्ता हिसाम मट्टको को लेकर रविवार को रामघाट रोड स्थित विकास कांप्लेक्स में एआरवी लगवाने पहुंचे थे। टोकरी से निकालकर वह उत्सुक लोगों को मट्टको को दिखा रहे थे। इसी बीच जर्मन शेफर्ड कुत्ता लेकर एक व्यक्ति वैक्सीन लगवाने पहुंचा। मट्टको को देखकर जर्मन शेफर्ड कुत्ता गुर्राया तो हिसाम ने उसे फिर से बास्केट में छिपा लिया।
सबके साथ दोस्ताना व्यवहार
अधिवक्ता हिसाम कहते हैं कि यह पूरे परिवार की जान से प्यारी है। पांच साल की है। जन्म के कुछ समय बाद एक संबंधी जर्मनी से लेकर आए थे। मटक-मटक कर चलती है, इसलिए इसका नाम मट्टको रख दिया है। परिवार के साथ ही नहीं बल्कि घर में आने वाले मेहमानों के प्रति दोस्ताना व्यवहार करती है। हाथ मिलाती है और साथ में खेलती है। कभी गुस्सा नहीं करती। व्यक्तित्व देखकर व्यवहार करती है। बच्चों के साथ दिन भर खेलती रहती है।
हिसाम मुस्कुरा कर कहते हैं कि घर में मेरी इतनी वैल्यू नहीं है, जितनी इसकी है। निर्धारित समय पर वैक्सीन लगवाते रहते हैं ताकि बीमारी से बचाया जा सके। वह कहते हैं, मट्टको को लैपटॉप या कंप्यूटर पर बैठना सबसे प्रिय है। इस पर मासिक करीब दो से ढाई हजार रुपये खर्च हैं।
155 से अधिक पालतू जानवरों को लगा टीका
रामघाट रोड स्थित विकास कांप्लेक्स में रविवार को पालतू पशुओं के लिए नि:शुल्क रैबीज वैक्सीनेशन एवं हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया गया। इसमें करीब 155 से अधिक विभिन्न नस्ल के कुत्तों और बिल्लियों को वैक्सीन लगाई गई। डॉ. विराम वार्ष्णेय एवं अंतरिक्ष वार्ष्णेय ने शिविर लगाया था। अंतरिक्ष वार्ष्णेय ने बताया कि कैंप में जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर, पग प्रजाति, रॉटविलर, भूटिया, बीगल्स व मल्टीज नस्ल के कुत्तों के साथ ही स्ट्रीट डॉग को भी वैक्सीन लगाई गई है।
कुत्तों को संभाले रखना बड़ी चुनौती
टीकाकरण शिविर में कुत्तों को संभाले रखना चुनौतीपूर्ण कार्य था। विभिन्न नस्ल के कुत्ते एक-दूसरे को देखकर झपट्टा मारने को तैयार थे। स्वामियों को संभाले रखने में पसीने छूट गए। एक के हटने के बाद ही लोग दूसरे को चार पहिया वाहनों से नीचे उतारते थे। कुछ लोग बाइक से भी पशुओं को लेकर आए थे।