अधिवक्ता काउंसलर योगेश सारस्वत के अनुसार परिवार न्यायालय में दंपती विवाद के चलते 2006 से महिला ने अपने व नाबालिग पुत्री के लिए भरण पोषण वाद दायर किया था। जिसमें 2007 में आदेश के बाद भी आज तक कोई भरण पोषण नहीं दिया। आरोप था कि अकराबाद क्षेत्र की महिला की शादी 2003 में बन्नादेवी के व्यक्ति से हुई थी। मगर दहेज के लिए उसे निकाल दिया गया। मामले में अदालत के आदेश पर 2008 में रिकवरी वारंट भी जारी हुआ। मगर भरण पोषण नहीं दिया। एक अन्य मामले में 65 वर्ष की महिला व 75 वर्ष के बुजुर्ग के बीच सुलह कराकर साथ भेजा गया। इन दोनों पर चार पुत्र व तीन पुत्रियां हैं।
ये रहे मौजूद
दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार सिंह, सचिव दीपक बंसल, दि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद कुमार सक्सेना, एडीजे हरविन्द्र सिंह, सुभाष चन्द्रा, राकेश वशिष्ठ, संजय कुमार यादव, अभिषेक कुमार बागडिय़ा, पारुल अत्री, रवीश कुमार अत्री, नवल किशोर सिंह, प्रदीप कुमार जयंत, प्रदीप कुमार राम, अनिल कुमार, विनय तिवारी, अमित कुमार तिवारी, अंजू राजपूत, ललिता गुप्ता, ज्ञानेन्द्र सिंह-द्वितीय, रचना, सीजेएम शिवम कुमार के अलावा अन्य न्यायिक अधिकारियों में अशोक कुमार सिंह, नेहा रूंगटा, संगीता, गजेन्द्र सिंह, कृति सिह, शिवांक सिंह, राशि तोमर, गंधर्व पटेल, अखिलेश कुमार निज़वान, रजत सिंह यादव, सौम्या मिश्रा, विधि सिघंल, सौरभ मंडलोई, यशस्वी सिंह, ज्योति वर्मा, विजय चैधरी, महिमा सिंह, मोहित नरवाल, आशुतोष वर्मा, आशीष सिंह, रईस अहमद, राम किशन शर्मा, प्रेम नारायन कुलश्रेष्ठ आदि थे। परिवार न्यायालय के काउंसलर योगेश सारस्वत, योगेश शंकर भारद्वाज, अनीता गर्ग, यतेंद्र कुमार, मीडिएटर योगेंद्र उपाध्याय, नरेंद्र कुमार, शबनम फातिमा, सुमन वर्मा भी उपस्थित रहे। इसी न्यायालय में प्रमोद कुमार कुलश्रेष्ठ, विनोद कुमार, अतेना कुमार, यशपाल, देवेंद्र, आदर्श, राजेंद्र त्यागी आदि थे।