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अलीगढ़ : विवाहिता की हत्या में पति को उम्रकैद की सजा

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मडराक के गांव हसनपुर में विवाहिता की दहेज हत्या के मुकदमे में एडीजे-13 नरेंद्र पाल राणा की अदालत ने आरोपी पति को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि अदालत में जिरह के दौरान मायके पक्ष के सभी गवाह माता-पिता व बहन पक्षद्रोही हो गए और विवाहिता द्वारा आत्महत्या करार देने का प्रयास किया, मगर अदालत ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही को आधार मानते हुए फैसला सुनाया।
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अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी चौ. जितेंद्र सिंह व सुधाकर कुलश्रेष्ठ के अनुसार, घटना 22/23 अक्तूबर 2019 की है। गांव तालिब नगर जवां के कुंवरपाल ने 23 अक्तूबर को थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था कि उन्होंने अपनी बेटी ममता की शादी गांव हसनपुर, मडराक के धर्मेंद्र उर्फ पप्पू संग 11 फरवरी 2018 को थी।दहेज में 5 लाख रुपये की मांग को लेकर बेटी का उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। बाद में बेटी की गला दबाकर हत्या कर दी गई।
न्यायालय में साक्ष्य व जिरह के दौरान मुख्य गवाह पिता वादी कुंवरपाल, मां शकुंतला देवी व बहन नीरज गवाही से मुकर गए। तीनों ने यह कहा कि कभी दहेज को लेकर उत्पीड़न नहीं किया और न गला दबाकर मारा गया, बल्कि ममता द्वारा खुद फांसी लगाकर आत्महत्या की बात कही। इसके बाद पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. केके शर्मा ने गवाही में स्वीकारा कि महिला की मौत दम घुटने से हुई थी, जिस तरह की चोट और परिस्थितियां पोस्टमार्टम में पाई गईं, वह सिर्फ गला दबाने से ही हो सकती हैं। अदालत ने डॉक्टर की इसी गवाही को आधार माना और कहा कि चोटों व परिस्थितियों के अनुसार, यह मौत आत्महत्या संभव नहीं है। ये हत्या का मामला है। अदालत ने आरोपी को दहेज हत्या की बजाय हत्या में दोषी करार देकर उम्रकैद व 25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। पक्षद्रोही गवाहों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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