अलीगढ़ के अतरौली में विवाहिता की गला दबाकर मार दिया गया था, उसके बाद शव को फंदे पर लटका दिया था। पोस्टमार्टम से मामला हत्या का निकला और पति व ससुर के खिलाफ मामला न्यायालय में चला। तीन साल बाद न्यायालय ने पति व ससुर को दस-दस साल की सजा सुनाई है।
जिला जज डा.बब्बू सारंग की अदालत से विवाहिता की दहेज के लिए हत्या के दोषी पति व ससुर को दस-दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। साथ में जुर्माना भी नियत किया है। यह घटना तीन वर्ष पहले अतरौली में हुई थी। जहां बाइक के लिए विवाहिता को गला दबाकर मारा गया था। बाद में उसे आत्महत्या दर्शाने के लिए शव फंदे पर लटका दिया था। मगर पोस्टमार्टम में सच सामने आया। उसी आधार पर सजा सुनाई गई है।
अभियोजन अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी चौ.जितेंद्र सिंह के अनुसार घटना 28 मई 2020 की दोपहर की है। वादी मुकदमा अतरौली के ही शमशेर अली ने मुकदमा दर्ज कराया कि उन्होंने अपनी बेटी तैयबा नगीना की शादी छह माह पहले सराय वली अतरौली के आदिल संग की थी। शादी के कुछ दिन बाद ही दहेज के लिए उसे परेशान किया जाने लगा। एक दिन घर से निकाल दिया।
कुछ दिन बाद आदिल यह कहते हुए विवाहिता को मायके से ले गया कि उसने अलग किराये का मकान ले लिया है। वहां रहेगा। घटना वाले दिन उन्हें खबर मिली कि बेटी को मारपीट कर हत्या कर शव लटका दिया है। इस सूचना पर जब वे पहुंचे तो उसे आत्महत्या बताने की कोशिश हुई। पुलिस ने मुकदमे के आधार पर पोस्टमार्टम किया और चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट, साक्ष्य व गवाही के आधार पर पति आलिद व ससुर चमन खां को दोषी करार देकर दस दस वर्ष कैद के अलावा 15500-15500 रुपये जुर्माने से दंडित किया है।