आरोप था कि दहेज में एक लाख रुपये व बाइक की मांग को लेकर शबाना को पीटा जाने लगा। 5 दिसंबर 2008 की रात शबाना को घर में जला दिया। गंभीर हालत में उसे जेएन मेडिकल कालेज में भरती कराया, जहां 12 दिसंबर 2008 को उसकी मौत हो गई।
अलीगढ़ में छर्रा कस्बे के दहेज हत्या के मुकदमे में अदालत ने पति व सास को बरी कर दिया है। वहीं इसी मामले में पति को मारपीट उत्पीडऩ का दोषी करार देकर दो वर्ष की सजा सुनाई है।
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बचाव पक्ष के अनुसार इस संबंध में कोतवाली नगर क्षेत्र के उस्मानपाड़ा निवासी अब्दुल रशीद ने छर्रा में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें कहा था कि बेटी शबाना परवीन की शादी घटना से पांच साल पहले छर्रा के पठान मोहल्ला निवासी मुशीर अहमद संग की थी। उसके बाद से ही दहेज में एक लाख रुपये व बाइक की मांग को लेकर शबाना को पीटा जाने लगा।
पांच दिसंबर 2008 की रात शबाना को घर में जला दिया। गंभीर हालत में उसे जेएन मेडिकल कालेज में भरती कराया, जहां 12 दिसंबर 2008 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में पति मुशीर अहमद, ससुर शबीब खां व जेठ अवजाइश को नामजद किया गया। उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सत्र परीक्षण के दौरान 23 नवंबर 2022 को ससुर की मौत हो गई।
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सत्र परीक्षण के दौरान दहेज हत्या को लेकर पुलिस की कहानी न्यायालय में साबित नहीं हुई। इसी आधार पर पति को दहेज हत्या में बरी किया है। वहीं पति को उत्पीडऩ व मारपीट का दोषी मानकर दो वर्ष कैद व सात हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।