आलमगीर का अर्थ है सारे जहां में फैला हुआ। नाम के अनुरूप ही छात्र आलमगीर की हत्याकांड का मामला अब एएमयू की परिधि तक सीमित नहीं रहा। यह विश्वभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका असर है कि एएमयू के एल्युमिनाई मीट 2015 में देश विदेश से शामिल होने आए सैकड़ों मेहमानों के बीच यह प्रकरण खासा बहस का मुद्दा बना हुआ है। सभी यह जाने को बेचैन दिखे कि आखिर आलमगीर हत्याकांड सुलझ क्यों नहीं रहा। छात्रों का धरना प्रदर्शन भी निरंतर जारी है। एक महीने बाद भी हत्याकांड के सभी आरोपी पुलिस गिरफ्त से बाहर क्यों हैं। दरअसल, आलमगीर के परिजन, एएमयू के छात्र, यूनिवर्सिटी इंतजामिया और जिला प्रशासन अपने ढंग से मामले का पटाक्षेप चाहते हैं।
18 सितंबर की शाम आलमगीर को एएमयू कैंपस में गोलियों से भून दिया गया था। हत्याकांड के कई दिन बाद तक उसके परिजन खामोश रहे। लेकिन 15 अक्तूबर को अचानक आलमगीर के पिता शमीम अहमद अलीगढ़ आए और एक के बाद एक कई आरोप मढ़ दिए।
उन्हाेंने एएमयू पीवीसी को हत्याकांड में घसीटने की कोशिश की। आलमगीर के पिता का कहना है कि उसका विवि इंतजामिया और पुलिस प्रशासन पर एतबार नहीं, इसलिए हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराई जाए। उनका यह भी कहना है कि मांगने के बाद भी 50 लाख रुपया मुआवजा और सहारनपुर में एक सरकारी नौकरी देने कीं मांग विवि इंतजामिया पूरा नहीं कर रहा। जबकि यह प्रस्ताव उनके पास एएमयू प्रॅाक्टर लेकर आए थे। इन्हीं आरोपों के बीच छात्रों ने एएमयू वीसी लॉज पर धरना शुरू कर दिया, जो सर सैयद डे और एलुमिनाई मीट के दौरान भी जारी है। इधर, एएमयू वीसी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जमीरउद्दीन शाह ने शमीम अहमद पर धमकाने का आरोप लगाया है। उन्हाेंने शनिवार को कहा कि शमीम ने उन्हें फोन कर कहा कि रविवार तक 10 लाख रुपये नहीं दिए गए तो छह हजार लड़के एएमयू में होंगे..। एल्युमिनाई मीट में 20 से अधिक देशों से करीब 600 मेहमान आए हैं। सैकड़ों अतिथि कैंपस में मौजूद हैं और अपनी पुरानी यादें साझा कर रहे हैं। इसी तरह देश के सभी प्रांतों से भी यहां लोग आए हुए हैं, पर सभी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखे। सुरक्षा को लेकर सवाल सभी के मन में कौंध रहा है कि आलमगीर के साथ ऐसा हुआ तो उनके बच्चे कैसे महफूज रह सकते हैं?