सनातन हिंदू धर्म नहीं है बल्कि जीवन जीने की पद्धति है, यह आदि-अनादि और अनंत है। हिंदू समाज एकजुट होकर पंच परिवर्तन को अपनाएं और बच्चों को संस्कारवान बनाएं। यह बात गोंडा के लगसमा इंटर कॉलेज में 12 फरवरी को हिंदू सम्मेलन में मुख्य अतिथि वृंदावन नाभापीठ सुदामा कुटी के आचार्य ज्ञानेश गौड़ ने कहीं।
उन्होंने कहा कि हमारे धर्म का इतिहास लाखों वर्ष पुराना है, जबकि अन्य पंथ कुछ हजार वर्ष पूर्व पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार विहीन हो रहे बच्चों की शिक्षा पर जोर दें। अपने पाल्यों को हिंदुओं के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से परिचित कराएं। उन्हें राम के चरित्र का अनुसरण करने को प्रोत्साहित करें। माता, पिता, भाई, पत्नी कैसे होने चाहिए ये रामचरित मानस के पाठ से सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म का त्याग समाज को पतन की ओर ले जाता है।
मुख्य वक्ता सह विभाग बौद्धिक प्रमुख हरिगढ़ जगदीश ने कहा कि यह अयोजन हिंदू समाज में जागरुकता फैलाने के लिए किए जा रहे हैं, राष्ट्रहित सर्वोपरि और संस्कृति सुरक्षित रखने को भाषा,जाति, परिवार और क्षेत्रवाद का त्याग करें। समाज को संगठित रखने को पंच परिवर्तन का पालन करें, स्वदेशी उत्पादों का प्रयोग करें। कहा कि आजकल फूड जिहाद चल रहा है, उसके प्रति सजगता बरतें।
हिंदू सम्मेलन का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। अध्यक्षता पूर्व प्रधान सुरेन्द्र कुमार अटल व संचालन विहिप जिला सह मंत्री अभिषेक पालीवाल ने किया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख चौधरी नरेन्द्र सिंह, भारतीय किसान संघ प्रदेशाध्यक्ष गुलवीर सिंह, डॉ. सुरेश चन्द्र, आरएसएस पदाधिकारी डॉ. सत्यपाल सिंह, अजीत, ज्ञानेन्द्र वार्ष्णेय, संतोष माधव, अनुज गौड, धर्मा भैया, मास्टर ऋषि कुमार, तरुण अटल आदि मौजूद रहे।