भले ही नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को इटावा जनपद के ग्राम पुरावली में हुआ हो, किंतु पूरे हिंदी जगत के साथ सभी काव्य-प्रेमी उन्हें अलीगढ़ से जोड़कर देखते रहे हैं। देखें भी क्यों न! आखिर जीवन के बेशकीमती कितने ही दशक नीरज ने अलीगढ़ के नाम किए और अपनी एक से बढ़कर एक उपलब्धि से अलीगढ़ को गौरवान्वित करते रहे। यूं देखा जाए तो नीरज पूरी दुनिया पर छा जाने वाले गीतकार रहे हैं। जहां-जहां हिंदी है वहां-वहां नीरज हैं।
नीरज गीत को परिभाषित करते हुए कहते थे कि ‘गीत तो अस्तित्व का नवनीत है’। नीरज ने गीत को बहुरूप सजाया, संवारा और एक नये सांचे में ढाल कर पूरी दुनिया को गीतकार ‘नीरज’ का दीवाना बना दिया। नीरज जी ने फिल्मों के लिए लगभग 125 से कुछ अधिक ही गीत लिखे, जिनमें से अधिकांश सुपरहिट रहे। फिल्मों में आप के गीतों का कारवां (कारवां गुजर गया) से प्रारंभ होकर एक के बाद एक सुपरहिट गीत से फिल्मी संगीत को समृद्ध करता रहा। गीतों के अतिरिक्त गजल, दोहे, और हाइकु आदि अन्यान्य विधाओं को भी नीरज की कलम ने समृद्ध किया है।
उन्होंने गजलों के लिए एक अलग ‘गीतिका’ नाम दिया और उसके अंग-प्रत्यंगों के लिए अलग शब्दावली गढ़ी। वहीं दोहों में भी आपने अद्भुत प्रयोग किए। कवि कर्म को महिमामंडित करते हुए आपका यह दोहा तो आज सूक्ति की तरह प्रयोग किया जाता है- आत्मा के सौंदर्य का, शब्द रूप है काव्य। मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य। नीरज अपने आप को प्रेम से बढ़कर आध्यात्म का कवि मानते थे। नीरज जी जैसा विद्वान सदियों में पैदा होता है।
हिंदी-संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी साहित्य पर भी आपकी जबरदस्त पकड़ थी। इसी के साथ आप ज्योतिष के भी गंभीर अध्येता थे। नीरज जी की ज्योतिष पर केंद्रित एक पुस्तक तो पूरी तरह दोहों में रचित है, पुस्तक के दोहों में ज्योतिष के गूढ़ रहस्यों को बहुत सहजता से प्रस्तुत किया गया है। जन्म कुंडली के आधार पर जीवन के उतार-चढ़ाव का सही मूल्यांकन कर प्रस्तुत करना उन्हें बखूबी आता था। जीवन में एक बार बहुत ज्यादा संकटों से घिरा होने पर नीरज जी ने मेरी जन्मकुंडली देखकर जो कुछ बताया, वह अक्षरश: सत्य प्रमाणित हुआ। नीरज जी जन्म कुंडली के आधार पर ही अटल जी के साथ अपने जीवन की कई स्थितियों को जोड़कर प्रस्तुत करते थे।
नीरज जी के साथ मैंने कितनी ही काव्य-यात्राएं कीं। हिंदी के लोकप्रिय ??लकारऽ पुस्तक उनके साथ संपादित की। ‘नीरज के प्रेम गीत’ का संपादन भी मैंने किया और निरंतर मिलने और विभिन्न विषयों पर चर्चा के साथ ही उनके विराट व्यक्तित्व के अंदर छिपे एक फकीर और मासूम बालक से निरंतर साक्षात् होता रहा। हिंदी जगत और विशेष रूप से हिंदी कविता को नीरज जी ने इतना कुछ दिया है कि वह कभी उनके योगदान से उऋण नहीं हो सकती।
- अशोक अंजुम
अशोक अंजुम।- फोटो : CITY OFFICE