प्रेमचंद के गोदान को महाकाव्य की संज्ञा दी गई है। प्रेमचंद का हिंदी ही नहीं, बल्कि उर्दू में भी कोई तोड़ नहीं है। सर्वाधिक पाठक कहीं मिलते हैं, तो वह प्रेमचंद के ही मिलते हैं। बच्चों के लिए लिखी कहानियों को उनके अभिभावक भी बड़े चाव से पढ़ते हैं। प्रेमचंद आम बोलचाल की भाषा से कभी डिगे नहीं, जिसे उस समय भी लोग गलत कहते थे। 100 साल पहले हिंदी साहित्य की नींव प्रेमचंद ने डाली थी, वह आज भी मान्य है। वह आज के समय के सर्वमान्य साहित्यकार हैं।
-सुरेश कुमार, गजलकार व साहित्यकार
प्रेमचंद हैं हिंदी-उर्दू के युग प्रवर्तक लेखक
प्रेमचंद हिंदी के स्वतंत्रता आंदोलन और नवजागरण काल के सर्वाधिक लोकप्रिय और जाने-माने और पढ़े गए हिंदी-उर्दू के युग प्रवर्तक लेखक हैं। उनकी गांव और शहर की जिंदगी और वहां के पात्रों को लेकर लिखी गई रचनाएं एक समय में शिक्षितों को नहीं, अनपढ़ लोगों के लिए भी रिझाती रही हैं और उन्हें बेहतर इंसान बनाने में उन्होंने बहुत काम किया है। सामाजिक समस्याओं, कुरीतियों और पाखंडों को लेकर उन्होंने जिस साहस और बहादुरी के साथ आमजन की हिंदुस्तानी भाषा का उपयोग किया है, वह सराहनीय और सीखने योग्य है। उनकी लोकप्रियता कई बार तुलसीदास और कबीरदास की लोकप्रियता जितनी विस्तृत और सम्मानीय दिखाई देती है। 20वीं शताब्दी के प्रारंभ के समाज को जानने के लिए प्रेमचंद का साहित्य बेहद प्रमाणिक और विश्वसनीय है। उनके संपादक और फिल्म लेखक के रूप में उनको याद किया जाता है। सच है कि वह अपने समाज और समय के बड़े लेखक हैं, लेकिन साहित्य ने उनसे काफी आगे तक की यात्रा तय कर ली है।
-डॉ. प्रेमकुमार, वरिष्ठ साहित्यकार
प्रेमचंद का भाषाई कौशल अतुलनीय
प्रेमचंद की कोई कहानी ऐसी नहीं होगी, जिसमें दो वाक्य पढ़ लो, तो उसके बाद मुहावरा न मिल जाए। नमक के दरोगा मे कहीं गही यह बात आज के समय में भी देखने को मिलती है। उसमें कहा गया है कि नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूंढना जहां कुछ ऊपरी आय हो। मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चांद है, जो एक दिन दिखाई देता है। उनका भाषाई कौशल अतुलनीय है। वही जिंदा रहेगा, जो हिंदुस्तानी भाषा की बात करेगा। -डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, शिक्षक, हिंदी विभाग, ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल
प्रेमचंद का साहित्य और कविताएं ऐसी ही हैं, जिन्हें पढ़ते समय व्यक्ति उसमें डूब जाता है। उनका साहित्य अद्भुत व अद्वितीय है।
-डॉ. ऊषा शर्मा
प्रेमचंद के साहित्य में महिलाओं के दर्द, जानवरों से प्रेम को भी रेखांकित किया गया है। निर्मला और पूस की रात ही उनकी ऐसी ही रचना है।
-निर्मला,
प्रेमचंद का साहित्य पथ प्रदर्शक है। सामाजिक कुरीतियों को उन्होंने अपने साहित्य के जरिये रेखांकित किया है।
-राशि, छात्रा हिंदी विभाग, एएमयू
प्रेमचंद का साहित्य युवाओं को संदेश देता है। प्रेमचंद ने साहित्य के जरिये कई समस्याओं को लेकर रेखांकित है।
-नितेश, छात्र, हिंदी विभाग, एमएयू