ऊंचे हील की सैंडल पहनना फैशन बन गया है, पर युवती नहीं जानती हैं कि एएमयू में हुए शोध में यह निकल कर आया है कि ऊंची हील की सैंडल पहनने वालीं युवतियों को चलने में दिक्कतें होती हैं, उन्हें दर्द भी होता है। एक मिनट में 60 कदम चलने के बजाय उनके कदम छोटे हो जाते हैं, रफ्तार भी कम हो जाती है।
लंबी और स्टाइलिश दिखने के चक्कर में दो से पांच सेंटीमीटर ऊंची हील की सैंडल पहनने से युवतियों की गति, चाल और संतुलन बिगड़ रहा है। बहुत दिनों तक ऊंची सैंडल पहनने से युवतियों को पैरों के घुटनों से लेकर एड़ी तक दर्द की शिकायत हो रही है। एएमयू के शारीरिक शिक्षा विभाग की शोधार्थी शिवानी सिंह ने एक साल तक ऊंची हील पहनने वाली 45 युवतियों के संतुलन और चाल का अध्ययन किया है।
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उन्होंने बताया कि जिन युवतियों की लंबाई कम होती है, वे ऊंची हील की सैंडल पहनना पसंद करती हैं। एक सप्ताह में कम से कम पांच दिन ऐसी सैंडल पहनती हैं, क्योंकि उनमें लंबाई कम होने की हीनभावना रहती है। लगातार ऐसी सैंडल पहनने से उनके पैरों में घुटने से लेकर एड़ी तक दर्द रहता है, मगर वे उसे लगातार नजरंदाज करतीं रहतीं हैं। यही अनदेखी उन्हें आगे चल कर बड़ा शारीरिक कष्ट देती है।
शोधार्थी ने बताया कि उन्होंने 18 से 30 साल तक की युवतियों को अपने अध्ययन में शामिल किया था। उन्हें 15-15 के तीन वर्गों में बांट दिया। एक वर्ग की युवतियां जो पांच सेमी से ज्यादा ऊंची हील पहनती थीं। दूसरे वर्ग की युवतियां जो तीन से पांच सेमी से ज्यादा ऊंची हील पहनती थीं। तीसरे वर्ग की युवतियां तीन सेमी से कम ऊंची हील पहनती थीं।
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अध्ययन में पाया गया कि ऊंची हील की सैंडल पहनने वालीं युवतियों को चलने में दिक्कतें होती हैं, उन्हें दर्द भी होता है। एक मिनट में 60 कदम चलने के बजाय उनके कदम छोटे हो जाते हैं, रफ्तार भी कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे मॉड्यूल पर अध्ययन कर रही हैं, जिससे पता चलेगा कि लंबाई, वजन, संतुलन और शारीरिक भंगिमा को ठीक रखने के लिए कितनी ऊंची सैंडल पहनी जा सकती है।