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ऐसे थे हिंदुत्व के नायक कल्याण सिंह: पुण्यतिथि आज, ‘बाबूजी’ को श्रद्धासुमन अर्पित करने लखनऊ में जुटेंगे लोग

Wed, 21 Aug 2024 04:26 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

कल्याण सिंह शुरुआत से ही एक नारा देते थे कि गांव खुशहाल तो देश खुशहाल। मेरा बूथ, दस यूथ। इस नारे के सहारे वे पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करते थे। पार्टी के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैठकों या रैलियों में वे उस समय साधन न होने से साइकिल तक से जाते थे।
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कल्याण सिंह-राजवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ में अतरौली के गांव मढ़ौली में जन्मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे कल्याण सिंह की आज तीसरी पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर पिछले वर्ष आयोजित किया गया हिंदू गौरव दिवस इस बार लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने जा रहा है। इसमें जिले से पांच हजार लोगों के लखनऊ पहुंचने की तैयारी है। 

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कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर पिछले वर्ष नुमाइश मैदान में हिंदू गौरव दिवस मनाया गया था। उसी दिन यह घोषणा की गई कि यह आयोजन प्रतिवर्ष होगा। उसी क्रम में यह आयोजन इस बार लखनऊ में हो रहा है। मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित पूर्व राज्यपाल व पूर्व सीएम कल्याण सिंह बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। छात्र जीवन में जनसंघ से जुड़कर राजनीति करने लगे। इस समय वह लोगों से मिलने के लिए बाइक व साइकिल से अलीगढ़ आते-जाते थे। जिला मुख्यालय पर आगरा रोड मदार गेट स्थित शंकर धर्मशाला जो अब जर्जर भवन में तब्दील हो चुकी है, वहां जनसंघ का कार्यालय हुआ करता था। वे राजनीतिक ककहरा सीखने मढ़ौली से वहीं आया करते थे।

जीवन में सिर्फ दो चुनाव ही हारे
कल्याण सिंह पहली बार 1962 का चुनाव हारे। इसके बाद 1967 का चुनाव वह जीते। इंदिरा गांधी के लहर में 1980 में वह दोबारा चुनाव हारे। कल्याण सिंह विधायक, स्वास्थ्य मंत्री रहे, दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बाद में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। वह दस बार अतरौली से विधायक का चुनाव जीते और बुलंदशहर व एटा से क्रमश: 2004 व 2009 में सांसद निवार्चित हुए। कल्याण सिंह पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के तौर पर जाने जाते रहे। 
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1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा टूटने के बाद कल्याण सिंह हिंदुत्व छवि वाले नेता के रूप में पहचाने गए। अतरौली की जनता ने उन्हें तो हर चुनाव जिताया। साथ ही उनकी विरासत के तौर पर उनकी पुत्रवधू प्रेमलता वर्मा को 2004 व 2007 में विधायक बनाया। वर्तमान में कल्याण सिंह के नाती संदीप सिंह अतरौली से लगातार दो बार से विधायक और वर्तमान में मंत्री हैं। कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह लगातार दो बार उनकी परंपरागत सीट रही एटा लोकसभा से सांसद रहे हैं। 

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ऐसे थे हिंदुत्व के नायक कल्याण...

हिंदू हृदय सम्राट। हिंदुत्व के नायक। राम मंदिर आंदोलन के नायक। सरीखी अनगिनत उपाधियों से नवाजे गए स्व. कल्याण सिंह के सियासी-सामाजिक जीवन पर गौर करें तो अनगिनत ऐसे किस्से हैं जिससे उनके कद का अंदाजा लगाया जा सकता है। कल्याण सिंह उस दौर में जनसंघ से जुड़े, जब कांग्रेस का दौर था। जनसंघ में राजनीति दुर्लभ माना जाता था। मगर पिछड़ी जाति में हिंदू छवि और सख्त निर्णय लेने वाले के रूप में उभरते नेता ने हार नहीं मानी। अतरौली सीट पर जीत दर्ज कर प्रदेश में जनसंघ के इकलौते विधायक का खिताब अपने नाम दर्ज किया और राम मंदिर आंदोलन के समय लिए अपने फैसले से उसी अतरौली को देश दुनिया में पहचान दिलाई। उनके समर्थक उनके गांव की मिट्टी तक अपने साथ ले गए। 

गांव खुशहाल, देश खुशहाल और मेरा बूथ, दस यूथ का दिया नारा
कल्याण सिंह शुरुआत से ही एक नारा देते थे कि गांव खुशहाल तो देश खुशहाल। मेरा बूथ, दस यूथ। इस नारे के सहारे वे पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करते थे। पार्टी के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैठकों या रैलियों में वे उस समय साधन न होने से साइकिल तक से जाते थे। कल्याण सिंह अपने दोस्तों को हमेशा याद रखते थे। 

संघर्ष भरे जीवन में रामलला के दर्शन की इच्छा रही अधूरी
कल्याण सिंह का जीवन हिंदुत्व व राम मंदिर के लिए संघर्ष भरा रहा। उन्होंने विवादित ढांचा गिराए जाने के समय कारसेवकों पर गोली चलवाने के बजाय मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। दो बार भाजपा से नाराजगियों के चलते दूरी बनाई। मगर उनकी भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन की इच्छा अधूरी रह गई। 

भाजपा को भी था उनकी ताकत का अंदाजा
युवा जीवन में जनसंघ और फिर भाजपा को एक पौधे के रूप में सींचने वाले कल्याण सिंह की ताकत का अंदाजा भाजपा को भी था। जब पहली बार उन्होंने भाजपा से दूरी बनाई, तब भाजपा को नुकसान हुआ। दूसरी बार दूरी बनाई, तब भी भाजपा को नुकसान हुआ। 2013 में मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से कल्याण सिंह की पुन: भाजपा में वापसी हुई।


बाबूजी मेरे नायक हैं। उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने का प्रयास कर रहा हूं। उनके अनुयायियों द्वारा जो प्यार व सम्मान हमें मिलता है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी पुण्यतिथि पर आज हिंदू गौरव दिवस का मुख्य आयोजन लखनऊ में होने जा रहा है। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। -राजवीर सिंह राजू, पूर्व सांसद व कल्याण सिंह पुत्र

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