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वन भूमि कब्जाने का मामला गरमाया, पूर्वस्थिति लाने में जुटी प्रशासन एवं वन विभाग की टीम

Wed, 19 Dec 2018 01:34 AM IST
Priyesh Mishra न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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पट्टे के नाम पर कब्जाई गई अकराबाद ब्लाक के गांव इरखिनी मंडनपुर में अरबों रुपये कीमत वाली 254 एकड़ जमीन को किराये पर उठाए पर जाने के मामले में जांच तेज हो गई है। अब तक हुई जांच में पता चला है कि जीटी रोड से लगी इस भूमि पर एक निलंबित वन रेंजर की सहमति से किसानों ने पट्टे की भूमि को बढ़ाकर अवैध कब्जे किए हैं। रेंजर उनसे पैसे लेकर खेती कराता था। इस प्रकरण में जांच के लिए लखनऊ से आए मुख्य वन संरक्षक की जांच में भी वन रेंजर अशोक निमेष को दोषी पाया गया है। अब प्रशासन एवं वन विभाग की टीम अवैध कब्जे हटवाने में जुट गई है। 
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मंडनपुर में वन विभाग की 254 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीण एवं वन विभाग आमने सामने हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें तत्कालीन एसडीएम ने वर्ष 1975, 1985 एवं 1993 में यह भूमि पट्टे पर दी थी। लेकिन वन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1927 के मुताबिक दस नवंबर 1955 में धारा चार में हुए राज्यपाल के गजट नोटिफिकेशन धारा 6107/14 के हिसाब से यह भूमि वन विभाग की है। जिस पर पट्टाधारक किसान अवैध रूप से खेती करते आए हैं।

प्रभागीय वन निदेशक श्रीधर त्रिपाठी ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि किसानों की पट्टे की भूमि इसी वन भूमि से लगी है। किसानों ने वन रेंजर अशोक कुमार निमेष से सेटिंग कर इस भूमि पर कब्जा किया है। जांच में पता चला है कि रेंजर उक्त भूमि पर खेती कराने के नाम पर किसानों से पैसे लेते थे। वन प्रवर्तन दल के प्रभारी राजीव खन्ना ने इस मामले में वन रेंजर के खिलाफ अकराबाद थाने में 27 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी दिन थाना विजयगढ़ में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी गई। इसके बाद प्रभागीय वन निदेशक श्रीधर त्रिपाठी ने वन रेंजर को निलंबित करते हुए चार्जशीट थमा दी थी। उन्होंने पट्टे मामले में खुलासा किया कि पट्टा एसडीएम स्तर से नहीं बल्कि ग्राम सभा के स्तर से हुए हैं। 
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एच-2 केस भी हुआ है रेेंजर के खिलाफ 
वन विभाग की भूमि को बगैर प्रभागीय वन निदेशक की अनुमति के किसी विभाग को भी नहीं दिया जा सकता। निलंबित वन रेंजर अशोक निमेष पर शेखा झील के पास तीन किलोमीटर एरिया में बीएसएनएल को बगैर अनुमति के विभागीय जमीन में केबिल डालने के लिए देने का भी आरोप है। प्रभागीय वन निदेशक ने बताया कि इस मामले में आरोपी रेंजर के खिलाफ प्रवर्तन दल ने वन अधिनियम की धारा एच-2 में केस दर्ज कराया है। गत दिवस जांच के लिए आए मुख्य वन संरक्षक ने जांच में इस तथ्य को शामिल किया है। 
एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज है प्रकरण 
गांव मंडनपुर में वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला मुख्यमंत्री एंटी भू माफिया पोर्टल पर दर्ज कराया गया है। निलंबित रेंजर अशोक निमेष के स्थान पर वन क्षेत्राधिकारी पद पर वेद प्रकाश की तैनाती की गई है।

तहसीलदार कर रहे हैं जांच 
इस बहुचर्चित प्रकरण में डीएम के आदेश पर एडीएम प्रशासन अजय श्रीवास्तव ने कोल तहसीलदार गौतम सिंह को जांच सौंपी है। उन्होंने वन विभाग के साथ मिलकर जांच शुरू भी कर दी है। जल्द ही इस मामले का खुलासा होने की उम्मीद है।  

 

मंडनपुर प्रकरण में किसानों को किराये पर जमीन देने एवं बगैर अधिकार बीएसएनएल को तीन किलोमीटर भूमि में केबिल डालने की अनुमति देने के मामले में वन रेंजर अशोक कुमार निमेष के खिलाफ थाना अकराबाद एवं थाना विजयगढ़ में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनकी चार्जशीट की जांच मुख्य वन संरक्षक लखनऊ रमेश चंद्रा ने की है। जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है।

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- श्रीधर त्रिपाठी, प्रभागीय वन निदेशक 

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