बरामदे से कमरे तक पहुंची सेल
वर्ष 2018 में जब यह सेल सीमित संसाधनों के साथ संचालित होती थी, तब यह एसएसपी आवास के बरामदे से चलती थी। अब इसे अलग कमरे में शिफ्ट कर कंप्यूटर और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। प्रभारी सहित छह कर्मियों की तैनाती की गई है। एसएसपी नीरज जादौन का कहना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसे व्यवस्थित किया गया है। प्रदेश स्तर पर भी डीजीपी मुख्यालय से इसकी मॉनिटरिंग होती है।
शिकायत से लेकर सियासी पोस्ट तक नजर
सेल सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं है। विवादित पोस्ट, किसी घटना पर तीखी टिप्पणी या राजनीतिक बयानबाजी पर भी नजर रखी जाती है। यदि कोई पोस्ट अलीगढ़ से जुड़ी होती है तो उस पर पुलिस की ओर से जवाब दिया जाता है। हाल में जवां क्षेत्र के सुनाना गांव की घटना के दौरान कई पोस्ट पर पुलिस ने प्रतिक्रिया दी। अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए यह जरूरी कदम है।
ऐसे काम करता यह सेल
सोशल मीडिया के चार प्लेटफार्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स व व्हाट्सएप पर अलीगढ़ पुलिस के एकाउंट व चैनल बने हैं। जिन पर लोगों की शिकायत प्राप्त की जाती है। सेल में कार्यरत स्टाफ उन शिकायतों पर संबंधित थाने से जानकारी मांगते हैं। अगर कार्रवाई नहीं हुई है तो थाना पुलिस से अगले चंद घंटों में कार्रवाई कराकर शिकायतकर्ता को अवगत कराया जाता है। चाहे पोस्ट करने वाला जिले का है या प्रदेश या देश के किसी कौने से ताल्लुक रखता है। अलीगढ़ को लेकर कोई टिप्पणी की है तो उस पर यह सेल पुलिस कार्रवाई से अवगत कराते हुए जवाब देती है। एसएसपी इसकी लगातार निगरानी करते हैं। खुद भी एक्स पर सक्रिय रहकर जवाब देने से पीछे नहीं हटते।