पुलिस व बीएसए के सामने बेटे चेतन ने खुलकर आरोप लगाया। चेतन का कहना था कि उनकी मां के विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका पूजा चौधरी उनकी मां का लगातार उत्पीड़न कर रही थीं। एक मर्तबा विद्यालय के निरीक्षण को आए वित्त एवं लेखाधिकारी ज्ञानेंद्र ने एक घंटे तक उनकी मां को जमकर फटकारा। उनकी फटकार के पीछे सिर्फ एक दबाव था कि वह एमडीएम व वित्तीय चार्ज छोडक़र पूजा को दे दें। उनकी फटकार से मां तो मायूस हो गईं। वहां कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मी रो पड़ी थी। उत्पीड़न का यह क्रम यहीं नहीं रुका।
मार्च में उनकी मां को किसी कारणवश स्कूल पहुंचने में पंद्रह मिनट देरी हो गई। मां के देरी से पहुंचने पर स्कूल के गेट पर ताला लगा मिला। जिसके फोटो साजिश के तहत सोशल मीडिया तक वायरल हुए। बाद में एबीएसए ने निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट दी। इसके बाद उनकी मां का वेतन अगस्त तक रोका गया। वे कई बार बीएसए से मिले। तब सितंबर से वेतन मिलना शुरू हुआ। इसके बाद से भी मां पर चार्ज छोडऩे का दबाव था। अभी पांच माह का रोका गया एरियर वेतन नहीं दिया गया था। इन्हीं सब बातों से उनकी मां परेशान रहने लगी थीं। अब कुछ दिन से तनाव में थीं। वही उनकी मृत्यु का कारण बना है। उन्होंने मामले में उचित जांच व कार्रवाई की मांग अधिकारियों के समक्ष रखी है।
एक दिन पहले पूरा किया एसआईआर का काम
चेतन ने बताया कि उनकी मां इलाके के गांव हेवतपुर फगोई की बीएलओ थीं। उन्होंने अपना काम स्टाफ के सहयोग से एक दिन पहले पूरा कर लिया था। बेटे के अनुसार इस मृत्यु के पीछे एसआईआर से जुड़ा विवाद कोई कारण नहीं है। वह काम आसानी से पूरा हो गया था। उसकी रिपोर्ट भी बुधवार को पूरी दे दी गई थी।