राजनीतिक दल कहने को तो परिवारवाद का विरोध करते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। दशकों से इस जिले की राजनीति में भी परिवारवाद सिर चढ़कर बोल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह की पत्नी और बेटी को यहां की राजनीति रास आई तो पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के परिजन भी राजनीति की राह पर ही चले। कई मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसदों के परिजनों को भी यहां राजनीति खूब भायी।
मां के बाद बेटी, पिता के बाद पुत्र, पति के साथ पत्नी राजनीति में आए और सफल भी रहे। इस बार फिर नेताओं के परिजन चुनाव मैदान में होंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अतरौली से 10 बार विधायक रहे।
उनके बेटे राजवीर सिंह राजू पड़ोसी जिले बुलंदशहर की डिबाई सीट से विधायक रहे। वर्तमान में राजू एटा से सांसद हैं। कल्याण के सांसद बनने से रिक्त हुई अतरौली सीट से उनकी पुत्रवधू प्रेमलता विधायक बनीं। इसी तरह पूर्व कबीना मंत्री जयवीर सिंह की पत्नी राजकुमारी चौहान अलीगढ़ से सांसद चुनी गईं।
जयवीर के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। इगलास से चौ.मलखान सिंह विधायक चुने गए थे। उनकी मौत के बाद पत्नी विमलेश कु मारी भी इगलास से ही विधायक निर्वाचित हुईं। दो बार गंगीरी और वर्तमान में अतरौली से विधायक वीरेश यादव को भी राजनीति विरासत में मिली।
उनके पिता बाबू सिंह यादव भी अतरौली और गंगीरी से विधायक रहे।
पूर्व कबीना मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय इसी जिले की इगलास सीट से विधायक रहे। बाद में उन्होंने यहीं से एमएलसी (स्थानीय निकाय) का चुनाव भी जीता। फिलहाल, वह बुलंदशहर की शिकारपुर से बसपा के प्रत्याशी हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री चौ.चरण सिंह के परिजनों के लिए भी अलीगढ़ की राजनीतिक जमीन काफी अच्छी रही। पहले चौ.चरण सिंह की पत्नी गायित्री देवी भी जहां जाट बाहुल्य इगलास विस क्षेत्र से विधायक रहीं तो उनकी बेटी और रालोद मुखिया चौ.अजित सिंह की बहन ज्ञानवती ने भी इस जिले में राजनीति की। वे इगलास व खैर से विधायक चुनी गईं।