शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। हवा में खतरनाक सूक्ष्म कणों की संख्या 100 के दायरे से ऊपर उठते हुए 405 तक पहुंच गई है। सबसे ज्यादा खराब हालात दुबे का पड़ाव पर हैं, जहां प्रदूषण का स्तर बेहद खराब है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की हाल की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आया है। रसलगंज, बारहद्वारी, एएमयू सर्किल पर भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। एएमयू के भूगोल विभाग के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद ने बताया कि बारिश होने तक धुंध से राहत नहीं मिलेगी। बारिश के बाद धुुंध छटेगी। इसकी वजह पराली और कूड़ा जलाना, वाहनों और फैक्ट्रियों का वायु प्रदूषण है। जिस पर सख्ती से रोक नहीं लग पा रही है।
पांच नवंबर को प्रदूषण का मीटर
1-दुबे का पड़ाव पीएम-10 का स्तर 405.9, पीएम-2.5 का स्तर 61.10, नाइट्रोजन आक्साइड 180.03, कार्बन डाईआक्साइड 10.46 माइक्रो घनमीटर।
2-बारहद्वारी पीएम-10 का स्तर 177.7, पीएम-2.5 का स्तर 35, नाइट्रोजन आक्साइड 879, कार्बन डाईआक्साइड 3095, सल्फर डाईआक्साइड 1336 माइक्रो घनमीटर।
3-रसलगंज पीएम-10 का स्तर 264.8, पीएम-2.5 का स्तर 52.3, नाइट्रोजन आक्साइड 113.05, कार्बन डाईआक्साइड 551 माइक्रो घनमीटर।
4-एएमयू सर्किल पीएम-10 का स्तर 132.1, पीएम-2.5 का स्तर 55.09, कार्बन डाईआक्साइड 97.09 माइक्रो घनमीटर।
नोट : पीएम का अर्थ पार्टीकुलेट मैटर यानी हवा में घुलनशील अतिसूक्ष्म हानिकारक कण हैं, जो श्वांस के साथ शरीर में जाते हैं। पीएम-10 का मानक किसी भी सूरत में 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होना चाहिए जो अलीगढ़ में 132 से 405 तक पहुंच गया है। इसी तरह से पीएम-2.5 वर्तमान में 60 के इर्दगिर्द है।
प्रदूषण से धुंध और कोहरा बढ़ता है : प्रो. अतीक अहमद
एएमयू के भूगोल विभाग के प्रोफेसर अतीक अहमद सिद्दीकी कहते हैं कि जलवाष्प से संघनित छोटी पानी की बूंदे वायुमंडल में कोहरे के रूप में फैल जाती हैं। जब कोहरे का धुएं के साथ मिश्रण होता है तो उसे धुंध, कुहासा या स्माग कहते हैं। धुंध एक तरह का कोहरा ही होता है, बस दृश्यता का अंतर होता है। यदि दृश्यता सीमा एक किमी या इससे कम हो तो उसे धुंध कहते हैं। कोहरे में ये दृश्यता कुछ मीटर तक सिमट तक जाती है।
दिल्ली, उत्तरी हरियाणा, दक्षिणी पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार देश के सर्वाधिक कोहरा प्रभावित क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में प्रदूषण, भू प्रयोग तरीके और कोहरे की आवृत्ति में सीधा संबंध है। दिल्ली जैसे शहरी परिवेश में हवा के अंदर भारी मात्रा में प्रदूषक तत्व संघनन के बाद जलवाष्प को कोहरे में बदल देते हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में खेतों की सिंचाई कोहरे के लिए जरूरत से ज्यादा नमीं उपलब्ध कराती है। भौगोलिक और मौसमी दशा के अलावा इलाके में भारी प्रदूषण कोहरे और धुंध के सहायक साबित हो रहे हैं। वर्तमान में अलीगढ़ शहर के आसमान पर बादलों के साथ धुंध है। वायु प्रदूषण में नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, सल्फ र ऑक्साइड्स, स्मोक और खतरनाक धुल कण इजाफा कर रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों और कोयले का धुआं, पराली व कूड़े को जलाने से निकलने वाला धुआं भी इसमें बढ़ोत्तरी कर रहा है। सर्दी के मौसम में वायु की गति कम होती है। ऐसे में धुल के कण प्रदूषण में स्थिर बने रहते हैं। जब तक हवा नहीं चलती या बारिश नहीं होती है ये धुंध छायी रहेगी।
पराली जलाने पर 55 किसानों के खिलाफ 34 मुकदमे, 97500 का जुर्माना
पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने अब तक 55 किसानों के खिलाफ कुल 34 मुकदमे दर्ज कराएं हैं। पराली जलाने से हो रहे वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय एवं एनजीटी के आदेशों के अनुपालन में तमाम जागरूकता कार्यक्रम कारगर साबित नहीं हुए हैं। कृषि विभाग की टीमों द्वारा जुर्माना लगाने के बाद भी पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। अब 55 किसानों के खिलाफ 34 एफ आईआर दर्ज कराई गई हैं, जिसमें आठ किसानों की गिरफ्तारी हुई है। लगभग 97500 रुपये का जुर्माना लगा कर 32500 रुपये वसूले गए हैं। इसके बावजूद घटनाएं न रुकती देख ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी तय कर दी गई है।