हाथरस में लोगों ने स्वास्थ्य विभाग पर लगाए आरोप
- फोटो : PTI
हाथरस में कैंसर रोगी के परिवार के 10 लोगों के कोरोना संक्रमित होने के मामले में नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा, अग्रवाल सभा सहित कई संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाते हुए जिले के नोडल अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
उनका कहना है कि एक परिवार के 10 लोगों के संक्रमित होने के पीछे यहां का स्वास्थ्य विभाग जिम्मेदार है। वहीं कैंसर पीड़ित के संक्रमित बेटे ने भी मुख्यमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक ने यह पहले ही अवगत करा दिया था कि उसके पिता की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है, लेकिन इसके बाद भी विभाग ने उसके पिता को वापस घर भेज दिया।
यही नहीं अब अपनी कमी को छिपाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने उसके कैंसर पीड़ित पिता व उसके खिलाफ झूठा मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। मालूम हो कि स्थानीय गली सीकनापान निवासी कैंसर पीड़ित एक कारोबारी पिछले दिनों कोरोना संक्रमित मिले थे।
उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने जेएन मेडिकल कॉलेज भेज दिया था। वहां उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद उनके परिवार को क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया था। परिवार के भी 10 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।
इनमें आठ माह का बच्चा भी शामिल है। इस बच्चे को अलीगढ़ के जेएन मेडिल कॉलेज भेजा गया, जबकि 9 लोग कोविड-1 अस्पताल मुरसान में दाखिल कराए गए।
दो दिन पहले उक्त कैंसर पीड़ित व उसके कोरोना संक्रमित बेटे के खिलाफ एसीएमओ ने कोतवाली हाथरस में संक्रमण को छिपाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस इस मुकदमे की विवेचना कर रही है। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ित के साथ-साथ नगर पालिकाध्यक्ष, अग्रवाल सभा सहित कई संगठनों ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग पर तीखे आरोप लगाए हैं और इस सिलसिले में मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन जिले के नोडल अधिकारी डॉ. वेदपति मिश्र को सौंपा है।
पीड़ित के बेटे ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उसने कहा है कि उसके पिता कैंसर पीड़ित हैं। वह 21 अप्रैल को अपने पिता को नोएडा के एक प्राइवेट अस्पताल में कीमोथैरेपी के लिए लेकर गया था। वहां यह कहा गया था कि बिना कोरोना की जांच किए उपचार नहीं होगा।
इस पर दोनों हाथरस आ गए थे और जिला अस्पताल में 23 अप्रैल को सैंपल लिया गया था। इसकी जांच रिपोर्ट 27 अप्रैल को मिली थी। तब यह जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इस पर वह 28 अप्रैल को फिर नोएडा के इसी अस्पताल में पहुंचे थे तो वहां के चिकित्सकों ने जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया था और उसी अस्पताल में कोरोना की जांच कराकर वापस भेज दिया था।
29 अप्रैल को अस्पताल के ई-मेल से रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पत्र में पीड़ित के बेटे ने कहा है कि अस्पताल से फोन कर जानकारी भी दी गई और यह भी कहा गया कि वह इस बारे में उनके जिले के सीएमओ व स्वास्थ्य विभाग को अवगत करा रहे हैं।
पत्र में उसने कहा है कि उसने अपने पिता के कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी उसी दिन स्वास्थ्य विभाग के संबंधित चिकित्सक को दे दी। यहीं नहीं यह रिपोर्ट उक्त चिकित्सक के मोबाइल पर व्हाट्सएप भी कर दी।
इसपर चिकित्सक ने उन्हें सीमेक्स इंटरनेशनल स्कूल में बुलाया तो वहां सेंपल लेकर वापस भेज दिया गया। इसके बाद 1 मई को जब मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट आई, तब उसके पिता को स्वास्थ्य विभाग अपने साथ ले गया और परिवार के अन्य सदस्यों को क्वारंटीन किया।
उसने शिकायत की है कि उसके पिता की रिपोर्ट आने के 9 दिन बाद परिवार के अन्य सदस्यों के नमूने भेजे गए। उसने आरोप लगाया है कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने घोर लापरवाही की है और अपनी लापरवाही बचाने के लिए उसके व उसके पिता के खिलाफ झूठा मुकदमा भी दर्ज करा दिया।
वहीं इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कई संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा ने उक्त पीड़ित के बेटे का यह पत्र नोडल अधिकारी को सौंपा। साथ ही अपना शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही की वजह से ही हाथरस में मामले बढ़े हैं।
अग्रवाल सभा ने नोडल अधिकारी को सीएम को प्रेषित ज्ञापन सौंपकर कैंसर पीड़ित और उनके बेटे के मुकदमे को निरस्त करने के साथ-साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। नोडल अधिकारी ने उन्हें उचित कार्रवाई के आश्वासन दिए हैं।