हाथरस में दरिंदगी का शिकार हुई अनुसूचित जाति युवती को 14 दिन मेडिकल कॉलेज में रखे जाने और उसे दिल्ली रेफर में देरी किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह बात भी निकल कर आई है कि युवती का एक विशेष किस्म का एमआरआई होना था, जो सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है। माना जा रहा है कि उपचार में इस प्रकार की उदासीनता भी बिटिया की जान चले जाने का एक कारण बनी है।
मंगलवार को नगर निगम में नगर सफाई मजदूर संघ के बैनर तले बिटिया को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही सभा का आयोजन भी किया गया। सभा में अध्यक्ष प्रदीप भंडारी, बिल्लू चौहान, बबलू कमल आदि नेताओं ने ये बातें कहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वजह थी कि हाथरस की बिटिया को जेएन मेडिकल कॉलेज में ही रखा गया।
उसे एडवांस उपचार के लिए दिल्ली या अन्य जगह पर क्यों नहीं भेजा गया। इसके अलावा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इंजीनियर आगा यूनुस ने कहा है कि यह बड़े अफसोस की बात है। 14 सितंबर से पीड़िता और बेहाल परिवार मेडिकल कॉलेज में जूझता रहा। उन्होंने कहा कि परिवार की एक रिश्तेदार के साथ खुद डॉक्टर से मिला। डॉक्टर ने भी बताया एक जांच जो मेडिकल कॉलेज में है ही नहीं। विशेष एमआरआई जरूरी बताई गई थी, लेकिन यह जांच मेडिकल कॉलेज और संभवत: अलीगढ़ में उपलब्ध नहीं है।