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हाथरस हत्याकांड: किरायेदार राम बनकर आए भगवान, बचा ली दंपती की जान... कुछ देर और होती तो जा सकती थी जान

Fri, 24 Jan 2025 03:52 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

रात्रि में करीब साढ़े 11 बजे तक हत्यारोपी विकास, उसका दोस्त व वीरांगना अपने बच्चों के साथ बातचीत में लगे रहे। परिवार को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि यह कोई और ही मंसूबा बनाकर घर आए हैं।
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आशीर्वाद धाम कॉलोनी में दो बच्चियों की गला रेतकर हत्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाथरस सदर कोतवाली क्षेत्र की आशीर्वाद धाम कॉलोनी में बुधवार रात दिल दहला देने वाली घटना में शिक्षक की दो नाबालिग बेटियों की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। शिक्षक और उनकी पत्नी को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षक छोटेलाल की पत्नी वीरांगना ने अपने नाम को सार्थक किया और साहस दिखाया। वह लहूलुहान हालत में छोटी बेटी को गोद में लिए हमलावरों से बचने को घर में इधर-उधर दौड़ती रही। शोर मचाती रही। इसी बीच मकान के ऊपरी हिस्से में रहने वाले किरायेदार राम इनके लिए भगवान बनकर आए और उन्हें आता देख, हमलावर भागने को मजबूर हो गए। वीरांगना और उसके पति की जान तो बच गई, लेकिन बेटियों की जान नहीं बचा पाई।

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माना जा रहा है कि पूरे परिवार के खात्मे के इरादे से आए हमलावर बिना मंसूबा पूरा किए ही भागने को मजबूर हो गए। घटना के बाद हुई पुलिस पूछताछ व अब तक की जांच में उजागर हुआ है कि आरोपी विकास अपने साथी संग रात नौ बजे करीब छोटेलाल के घर पर पहुंचा। रात्रि में करीब साढ़े 11 बजे तक विकास, उसका दोस्त व वीरांगना अपने बच्चों के साथ बातचीत में लगे रहे। परिवार को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि यह कोई और ही मंसूबा बनाकर घर आए हैं।

इस दौरान विकास व साथी ने खाना खाने से मना कर दिया। इस कारण वीरांगना ने खुद व अपनी बच्चियों को खाना खिलाया। खाना खिलाने के बाद बच्चियों को लेकर कमरे के अंदर बनी लॉबी में गद्दा डालकर बच्चियों के साथ वीरांगना सोने चली गई। विकास व उसका दोस्त छोटेलाल के कमरे में सो गए। इसके बाद शिक्षक परिवार के सदस्य तो नींद के आगेश में चले गए। मगर विकास व उसका साथी अपने काम में लग गए।

रात करीब 12.30 बजे जब अचानक कुछ अजीब सी आवाजें आने पर वीरांगना की आंख खुली तो उसने देखा कि उसकी बेटियां खून में लथपथ गद्दे से हटकर फर्श पर पड़ी हुई थी। फर्श पर खून ही खून बिखरा हुआ था। यह मंजर देख वीरांगना के होश फाख्ता हो गए। वीरांगना ने खुद को बचाने के साथ साथ मृत छोटी बेटी विधि को गोद में उठा लिया और भागने की कोशिश की। मगर विकास व उसके साथी ने महिला की गर्दन पर चाकू से हमला कर दिया।

चाकू लगने के बाद भी वीरांगना शोर मचाते हुए दरवाजे की ओर भागी और बचाने के लिए पुकार लगाने लगी। इसके चलते अंदर आंगन से लेकर बाहर लॉबी तक में खून ही खून दिखाई दिया। इसी बीच दोनों आरोपियों ने छोटे लाल गौतम के गले पर भी चाकू से वार कर दिया, जिसके चलते उनका पूरा बिस्तर भी खून में लथपथ हो गया। घर में चारो ओर बिखरा खून इस बात की गवाही दे रहा है, महिला ने किस तरह से जान बचाने के लिए घर में दौड़ती रही।

राम बचाओ... बचाओ, सुन दौड़ पड़ा था किरायेदार
जैसे ही वीरांगना पर चाकू से प्रहार हुआ तो वीरांगना ने खुद को बचाने के साथ साथ परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने के लिए घर में दौड़ते हुए अपने ही घर में किराये पर रहे रहे केनरा बैंक कर्मी राम को आवाज लगाई। घर के अंदर से जोर जोर से आवाज सुनाई देते ही पहले माले किराए पर रहे राम दौड़ पड़े। राम को ऊपर दौड़ने की आहट सुन व अन्य पड़ोसियों के गेट खुलने की आवाज सुनकर आरोपी विकास व उसका दोस्त भाग जाने में सफल हो गया। पुलिस यही मान रही है कि अगर किरायेदार राम न होता तो पति पत्नी की हत्या भी करके ही दोनों हत्यारोपी जाते।
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पैरालाइज्ड शिक्षक, दो मासूमों का गला रेतते समय नहीं कांपे हाथ
घर के अंदर के मंजर व खून में लथपथ फर्श की हालत को देख यह तो स्पष्ट हो रहा था कि हत्यारोपियों के इस जघन्य वारदात को करने के दौरान हाथ कांपे भी नहीं। पैरालाइज्ड छोटे लाल गौतम, जो कि इस दशा में हैं कि वह केवल बातों को सुन सकते हैं, सही तरीके से जवाब भी नहीं दे सकते हैं। यहां तक न तो चल सकते हैं और न ही हाथ पांव चला सकते हैं, उनके गले पर भी चाकू से वार किया। इनकी दोनों मासूम बेटियों का गला रेतने में हमलावरों के हाथ नहीं कापें और दोनों को मौत के घाट उतार दिया।
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