हाथरस कांड की आड़ में उत्तर प्रदेश में जातीय दंगे भड़काने की साजिश रची जा रही थी। पीएफआई की फंडिंग से इसका खुलासा होने पर चंदपा थाने में 20 गंभीर धाराओं में अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मुकदमे में अज्ञात मीडियाकर्मी व सोशल मीडिया से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इस मुकदमे में उस ऑडियो टेप का भी जिक्र किया गया है, जिसमें बिटिया के भाइयों को बरगलाने की बात सार्वजनिक हुई थी। चंदपा थाने में धारा 109, 120 बी, 124 ए, 153 ए, 153 ए 1, 153 ए 1 ए, 153 ए 1 बी, 153 ए 1 सी, 153 बी, 195, 195 ए, 465, 468, 469, 501, 505/1, 501/1 बी, 505/1सी, 505/2 व 67 आईटी एक्ट के तहत यह मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस मुकदमे में उल्लेख किया गया है कि हाथरस कांड को लेकर कुछ अराजक तत्व बेजा लाभ लेने के कुत्सित उद्देश्य से आपराधिक साजिश रचकर जातीय विद्वेष फैलाकर, सरकार की छवि बिगाड़ने व प्रदेश का अमन बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में पीड़ित परिवार को धमकाकर, बरगलाकर व भड़काकर गलत बयानी देने के लिए उन्हें 50 लाख रुपये का प्रलोभन दिया गया।
उन्हें सरकार के खिलाफ बयान देने, पूर्व में दिए गए बयान बदलवाने का प्रयास कर हाथरस की लोक व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया। एक कथित पत्रकार ने तो भाई को फोन पर यहां तक कहा कि पिता की बाइट दिलवाएं कि वे सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है, जबकि पिता व परिवार ने सार्वजनिक तौर पर कार्रवाई से संतुष्ट होने का बयान दिया था।
मुकदमे में यह आरोप है कि सामूहिक दुष्कर्म की जांच में पुष्टि न होने के बावजूद मीडिया में यह कहलवाया गया कि जांच से छेड़छाड़ हुई है। इसके अलावा एक नेता का ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें वह पीड़ित की रिश्तेदार महिला को यह कहा कि वह परिवार पर दबाव डाले कि मुआवजा नहीं चाहिए।