जातीय दंगा फैलाने की साजिश में रिमांड पर लिए गए पीएफआई के चारों सदस्यों को लेकर एसटीएफ शुक्रवार को यहां आई। एसटीएफ थाना चंदपा भी पहुंची और फिर इन चारों अधिकारियों को लेकर घटनास्थल पर भी गई। एसटीएफ ने अपनी यह कार्रवाई गोपनीय रखी। एसटीएफ इस मामले में पुख्ता सबूत जुटा रही है। पीएफआई इन चारों सदस्यों से पूछताछ के बाद कुछ और लोगों को चिन्हित भी कर रही है और कड़ी से कड़ी जोड़ रही है। यहां इनका लोकल कनेक्शन भी एसटीएफ ने तलाशा। यह चारों चंदपा थाने में दर्ज मुकदमे में भी आरोपी हैं।
उल्लेखनीय है कि शासन के आदेश पर थाना चंदपा में यह मुकदमा दर्ज कराया गया था कि बिटिया के प्रकरण की आड़ में पूरे प्रदेश में जातीय दंगा कराने की साजिश रची गई थी। राष्ट्रद्रोह जैसी संगीन धाराओं में में यह मुकदमा दर्ज है। इसमें आरोप लगाया गया था कि इस जातीय दंगे के लिए काफी फंडिंग हुई। इसके लिए वेबसाइट बनाकर व अन्य प्लेटफॉर्म तैयार कर फंड एकत्रित किया जा रहा था। सोशल मीडिया पर गलत जानकारी दी गई और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।
पीड़ित परिवार को धमकाकर, बरगलाकर उन्हें 50 लाख रुपये का प्रलोभन देने, हाथरस की लोक व्यवस्था को भंग करने जैसे आरोप इस मुकदमे में हैं। कई विवादित पोस्ट डालकर माहौल खराब करने का आरोप भी इसमें हैं। इस मुकदमे की विवेचना शुरू में हाथरस पुलिस ही कर रही थी, लेकिन उसके बाद इसकी विवेचना एसटीएफ की नोएडा शाखा कर रही है। इसमें मथुरा पुलिस द्वारा पकड़े गए पीएफआई के चार सदस्य अतीर्कुरहमान निवासी रतनपुरी, मुजफ्फरनगर, आलम निवासी घेर फतेर रामपुर, सिद्दीकी निवासी मल्लपुरम केरल व मसूद निवासी जरवल रोड, बहराइच भी आरोपी हैं। इन्हें मथुरा पुलिस ने हाथरस आते समय पकड़ा था। मथुरा से ही एसटीएफ ने इन्हें 48 घंटे के रिमांड पर ले लिया था।
शुक्रवार को एसटीएफ इन्हें लेकर चंदपा पहुंची। टीम कुछ देर के लिए थाने पर रुकी और उसके बाद इन्हें लेकर बिटिया के गांव को जाने वाले रास्ते पर भी गई। वहां घटनास्थल पर भी इन्हें ले गई। एसटीएफ इनके खिलाफ सबूत जुटा रही है। एसटीएफ को अंदेशा है कि इलाके में संगठन की गतिविधियां भी हैं और आरोपी पहले भी यहां आ चुके हैं। रिमांड पर लेकर एसटीएफ ने संगठन की गतिविधियों व संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद एसटीएफ इन्हें यहां से लेकर चली गई।