अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने समाजसेवी हर्ष मंदर के उस बयान का खंडन किया है, जिसमें कहा गया कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने हाल ही में 13 समाजसेवियों की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से मिलने से मना कर दिया था। एएमयू में हाल की घटनाओं के संबंध में रिपोर्ट जारी करते हुए हर्ष मंदर ने यह बयान दिया था।
एएमयू ने स्पष्ट किया कि उनका वक्तव्य वास्तविकता के खिलाफ है। उस दिन कुलपति प्रो. तारिक मंसूर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में होने वाली सेंट्रल यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर्स की एक कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए दिल्ली गए हुए थे। उनके कार्यालय को मुलाकात संबंधी कोई पत्र भी नहीं भेजा गया था।
एएमयू ने कहा कि यह कुलपति और विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। हकीकत यह है कि रजिस्ट्रार, कंट्रोलर, प्रॉक्टर और विश्वविद्यालय अधिकारियों ने उस दल के साथ करीब एक घंटे बैठक की और घटना से संबंधित तथ्यों से अवगत कराया। एएमयू प्रवक्ता ने कहा कि तथ्यों को छुपाना निंदनीय है।