मां के साथ जापानी छात्रा हाना। - अमर उजाला
हिंदी साहित्य के पन्नों में दर्ज गांव, समाज और रिश्तों के जरिए जापान की छात्रा हाना नोहारा भारत को समझने की कोशिश कर रही हैं। राही मासूम रजा, प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह और प्रो. असगर वजाहत की रचनाएं उन्हें भारतीय समाज और गांव की संस्कृति से रूबरू करा रही हैं।
ओसाका विश्वविद्यालय में एमए की छात्रा हाना के लिए हिंदी साहित्य सिर्फ भाषा सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय जीवन की विविधता और सामाजिक बारीकियों को जानने का जरिया भी बन गया है।
एएमयू के हिंदी विभाग में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आईं हाना ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इन साहित्यकारों की रचनाओं में भारत का गांव, वहां का जीवन और समाज बहुत सहज तरीके से सामने आता है। इन्हें पढ़कर भारत को समझना उनके लिए आसान हो रहा है। साहित्य के माध्यम से वह भारतीय समाज की विविधता और यहां के जीवन को जानने की कोशिश कर रही हैं।
हाना के लिए हिंदी साहित्य केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है। वह साहित्य में दर्ज सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी पढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी साहित्य पढ़ते हुए उन्हें भारतीय समाज को समझने का अवसर मिल रहा है। अलग-अलग साहित्यकारों की रचनाओं में गांव के बदलते स्वरूप, लोगों के जीवन और सामाजिक संबंधों की झलक मिलती है।
भारतीय खाना, गाने और फिल्में भी पसंद
हाना को भारतीय खाना, गाने और फिल्में भी पसंद हैं। भारतीय व्यंजनों में उन्हें चिकन बिरयानी काफी पसंद है। भारतीय खानपान, गाने और फिल्मों में भी उनकी रुचि है।