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जीएसटी चोरी का फंडा...49,999

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दुबे का पड़ाव पर ट्रक में माल लोड़ करते कर्मचारी। - फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम
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जीएसटी में कर चोरी का नया फंडा 49999 का है। यानी 50 हजार रुपये मूल्य से कम का बिल बना कर माल कहीं भेजा जा रहा है तो उसका ई वे बिल बनाना जरूरी है। ऐसे में माल भेजने वाली पार्टी साधारण बिल इस्तेमाल करती हैं। चेकिंग में 50 हजार रुपये से मूल्य (49999 रुपये) तक का बिल होने पर ई वे बिल मांगा नहीं जाता।
चेकिंग टीम माल भेजने और माल मंगवाने वाली दोनों पार्टियों का जीएसटी नंबर मिलान करती है। दोनों जीएसटी नंबर सही मिलने के बाद जांच टीम माल छोड़ कर पीछे हट जाती है, क्योंकि नियमानुसार ऐसा माल नहीं रोका जा सकता है। इसके बाद गंतव्य पर पहुंचने पर माल के साथ भेजा गया बिल फाड़ कर फेंक दिया जाता है और बस जीएसटी खत्म..। जी हां कर चोरों ने आज कल यही फार्मूला अपना लिया है। जिसमें कारोबारी और अधिकांश ट्रांसपोर्टर शामिल हैं, क्योंकि बिना ट्रांसपोर्टर की मिलीभगत के ऐसा संभव नहीं है।
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वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम जो भी ट्रक जांच के लिए रोक रही है। उसमें पांच से सात लाख रुपये का माल ऐसा ही मिल रहा है, जिसमें 50 हजार रुपये से कम मूल्य का बिल लगाया गया है। आलम ये है कि दिल्ली से आने वाला सर्वाधिक माल इसी फंडे पर आ रहा है। अलीगढ़ से भी ताला और हार्डवेयर को टुकड़ों में भेजा जा रहा है। जिससे विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। दिल्ली और अलीगढ़ ही नहीं प्रदेश और पूरे देश में यही फार्मूला अपनाया जा रहा है। गौर हो कि ई वे बिल बनवाने में कारोबारी को 100 से 200 रुपये तक खर्च करना होता है, इसलिए भी लोग इससे बच रहे हैं।
50 हजार से कम मूल्य का बिल लगा कर कर चोरी करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। ट्रकों में 50 हजार से कम मूल्य के कई माल मिल रहे हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में है। पूरे देश में अचानक ऐसे माल की संख्या बढ़ रही है। अब प्रदेश स्तर पर इसके लिए सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।
-एके माहेश्वरी, एडिशनल कमिश्नर एसआईबी वाणिज्य कर विभाग
छह महीने में 5.96 करोड़ का माल सील, 2.46 करोड़ वसूले
वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में छह महीने में ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। जिससे वाहनों पर साढ़े तीन सौ से ज्यादा छापों में विभाग को लगभग तीन करोड़ रुपये की कर एवं अर्थदंड प्राप्ति हुई है। इस अवधि में कर चोरी के संदेह में 275 वाहनों को कब्जों में लिया। जिसमें 5.96 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई।
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इन वाहन स्वामियों से 2.47 करोड़ रुपये कर और अर्थदंड में वसूले गए। इसी क्रम में खराब छवि के ट्रांसपोर्टरों के 27 वाहनों की जांच हुई, जिसमें 41.95 लाख रुपये की कर एवं अर्थदंड वसूली हुई। वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम के एडिशनल कमिश्नर एके माहेश्वरी ने बताया कि लगातार प्रवर्तन की कार्रवाई जारी है। संदेह या सटीक सूचना पर वाहनों को रोक कर उनकी जांच हो रही है। अब 50 हजार रुपये से कम मूल्य के बिल की माल की भी जांच होगी। ये जांच किसी भी जगह से शुरू हो सकती है। जिसके बाद उसके पूरे कारोबार को जांचा जाएगा। दोषी मिलने पर कर वसूली और अर्थदंड दोनों लगेगा।
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