लखनऊ में बोगस (फर्जी) फर्मों के माध्यम से 341 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आने के बाद राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के अलीगढ़ जोन (अलीगढ़ मंडल और आगरा मंडल का एक जिला) में भी बोगस फर्म खंगाली जा रही हैं। इस जोन में पंजीकृत 55 हजार फर्मों की सघन जांच शुरू कर दी गई है। सभी फर्मों के लेनदेन और जीएसटी रिटर्न की गहन समीक्षा की जा रही है।
विभाग को आशंका है कि इनमें सैकड़ों की संख्या में बोगस फर्म हो सकती हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी के लिए किया गया होगा। जीएसटी चोरी के इस बड़े रैकेट के खुलासे के बाद विभाग ने सख्ती दिखाते हुए सभी पंजीकृत फर्मों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है।
55 हजार फर्मों की स्क्रूटनी शुरू कर दी गई है। जीएसटी चोरी करने में मददगार ट्रांसपोर्ट कंपनियों, संस्थाओं, दबाव समूह आदि की भी विभाग जांच कर रहा है। इनके खिलाफ साक्ष्य सामने आने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। - अनिल कुमार राम त्रिपाठी, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2, जीएसटी अलीगढ़ जोन
मल्टी स्टेप और डेटा-आधारित प्रक्रिया से हो रही बोगस फर्मों की जांच
मल्टी स्टेप और डेटा-आधारित प्रक्रिया से इन फर्मों की जांच की जा रही है। डेटा एनालिटिक्स के द्वारा डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। इसमें संदिग्ध जीएसटीएन को ट्रेस किया जा रहा है। अगर एक ही पैन पर कई जीएसटी पंजीकरण हैं तो वह जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा अधूरे या गलत पते पर पंजीकरण, पंजीकरण के बाद अचानक बहुत बड़ी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करना, ऐसी वस्तुओं या सेवाओं में डीलिंग करना जो टैक्स चोरी के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं, पंजीकरण के बाद कारोबार के पते में बार-बार बदलाव करना जैसी गतिविधि सामने आने पर फर्म रडार पर आ जाती है।