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बिलखती दादी बोली: साहब मेडिकल भिजवा दो, नाती बहुत बीमार है; मुझे देखकर सवेरे से नहीं मुस्करा रहा

Thu, 28 May 2026 09:50 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

दादी कभी बच्चे का सिर सहलातीं तो कभी स्टाफ की ओर देखतीं। पिता पंकज बार-बार डॉक्टरों और कर्मचारियों से एंबुलेंस बुलाने की गुहार लगाता रहा लेकिन काफी देर तक मदद नहीं मिली तो डॉली अपनी सास रानी के पीछे शांत बैठ गई। वो सिर्फ बच्चे को देखती रही।
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जिला अस्पताल में जमीन पर बैठी दादी बीमार नाती को देखती, साथ में खामोश बैठी मां - फोटो : संवाद
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विस्तार
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साहब, कुछ भी करके हमें बस मेडिकल भिजवा दीजिए। मेरा नाती बहुत बीमार है..मुझे देखकर सवेरे से मुस्करा नहीं रहा। इसकी मां भी रोते-रोते खामोश बैठी है। डॉक्टर कह रहे हैं कि यहां से ले जाओ, मेडिकल में इलाज मिलेगा। वहां जाने के लिए कैसे भी करके एंबुलेंस बुला दो। यह गुहार लगाते-लगाते दादी रानी की आवाज भर्रा गई। 

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बुधवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में रानी और उनकी बहू खुद को अकेला महसूस करती रहीं। फर्श पर बैठी दादी की गोद में मासूम बच्चा गगन था और पीछे उसकी मां बैठी थी। उसके चेहरे पर घबराहट और थकान साफ दिख रही थी। आसपास ना कोई डॉक्टर, ना स्टाफ और ना ही कोई मददगार आया। ना किसी ने इस बिलखते परिवार को बैठने के लिए कुर्सी दी और ना पानी का पूछा।

दरअसल खिरनी गेट निवासी पंकज और डॉली का बेटा गगन पिछले कई दिन से बीमार चल रहा है। छह माह के इस बच्चे का उपचार एक वैद्य से चलता रहा, लेकिन कुछ आराम मिलने पर परिवार ने उपचार बंद कर दिया। बीते मंगलवार बच्चे को भूख लगी तो मां ने उसे पाउडर का दूध पिलाया जिसके बाद दोबारा बच्चे को ना भूख लगी और ना ही उसे मलमूत्र आया। 

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जब बच्चे का पेट फूल गया तो आनन फानन में दादी और मां उसे लेकर जिला अस्पताल दौड़े। यहां पहले ओपीडी और फिर इमरजेंसी में पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि इसका इलाज मेडिकल में हो सकता है, वहां ले जाओ। जाएं कैसे, इसके बारे में कुछ नहीं बताया। दोपहर 12.30 बजे परिवार अलग अलग लोगों से एंबुलेंस के लिए मदद मांगता रहा। 

दादी कभी बच्चे का सिर सहलातीं तो कभी स्टाफ की ओर देखतीं। पिता पंकज बार-बार डॉक्टरों और कर्मचारियों से एंबुलेंस बुलाने की गुहार लगाता रहा लेकिन काफी देर तक मदद नहीं मिली तो डॉली अपनी सास रानी के पीछे शांत बैठ गई। वो सिर्फ बच्चे को देखती रही। दोपहर 1.55 मिनट पर किसी ने जब एंबुलेंस को सूचना दी तब 2.07 मिनट पर एंबुलेंस पहुंची और गगन को मेडिकल में भर्ती कराया।
मुझे इस घटना की जानकारी नहीं है। मुझे लगता है कि किसी ने जानबूझकर लापरवाही नहीं की है। संभव है सूचना पहुंचाने में देरी हुई हो। - डॉ. जगवीर सिंह, सीएमएस
सूचना मिलने में देरी हुई है। एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज में थी। जब सूचना मिली है तो करीब 12 मिनट में परिवार को मदद दी गई। - अरशद, कार्यक्रम प्रबंधक, एंबुलेंस
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पांच किमी के लिए दो घंटे का इंतजार
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के बीच करीब पांच किलोमीटर की दूरी है। रानी और डॉली को अपने छह माह के बच्चे को ले जाने के लिए दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। दोपहर 12:30 से परिवार बिलखता रहा। दादी चिल्लाती रही और मां खामोश हो गई। दोपहर 1:55 बजे एंबुलेंस को सूचना मिली। 2:07 बजे एंबुलेंस आई और 2:35 बजे बच्चा मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुआ।

सलाह : हर मां के लिए जानना जरूरी
  • नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित है।
  • पर्याप्त दूध न आने या फिर शिशु को पाचन में कठिनाई होने पर पाउडर दूध की सलाह दी जाती है।
  • पाउडर का दूध डॉक्टर की सलाह के बिना ज्यादा मात्रा में न दें। हर महीने बच्चे की भूख बढ़ती है और पाउडर की मात्रा बढ़ानी होती है।
  • अगर डॉक्टर ने एक चम्मच की सलाह दी है तो मात्रा उतनी ही रखनी है। डिब्बे में आने वाली चम्मच से इसका माप करें।
  • बोतल और निप्पल की सफाई का विशेष ध्यान रखें, गंदगी से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
  • बच्चे का पेट फूलना, लगातार रोना, उल्टी होना या मल-मूत्र बंद होना गंभीर संकेत हो सकते हैं। ऐसे में घरेलू इलाज या वैद्य पर निर्भर ना रहें।
  • अगर बच्चा सामान्य से कम एक्टिव दिखे, मुस्कराना बंद कर दे या दूध पीना छोड़ दे तो इसे नजरअंदाज न करें।
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