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गोरक्षक किसी के दबाव में डरें नहींः तोगड़िया

Sun, 16 Jul 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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बैठक को संबोध‌ित करते अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया व मंचासीन अतिथिगण। - फोटो : अमर उजाला
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विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया ने प्रांतीय बैठक में कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने के लिए गुरू मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि गो रक्षकों को किसी के दबाव में आकर डरने की जरूरत नहीं हैं।
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वह निरंतर गोमाता की सेवा में लगे रहें। इस बात की परवाह करना छोड़ दें कि उन्हें लोग किस नाम से पुकार रहे हैं। आज देश को आवश्यकता है हिंदुत्व जागरण की। इसके लिए गांव-गांव जाकर हिंदुओं को जागरूक करें और जब तक न रुकें, तब तक देश हिंदू राष्ट्र नहीं हो जाता है। उन्होंने इस दौरान यह नारा भी दिया कि ‘हमें चाहिए हिंदू राष्ट्र ’।

शनिवार को प्रवीण भाई तोगड़िया आगरा रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे, यहां उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता व पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि परिषद के चारों तंत्र सत्संग, मातृ शक्ति, दुर्गा वाहिनी व बजरंग दल सभी संगठन से लोगों को जोड़ने के लिए कार्यकर्ता क्रियाकलाप करते रहें।
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दिसंबर में होने वाले बजरंग दल के कार्यक्रम में कम से कम देश के दो लाख युवाओं को जोड़ना है। इसके लिए कार्यकर्ताओं को अभी से संगठन के कार्य में प्रवास करना होगा। जिला कमेटी गोरक्षा, गो सेवा को हर इकाई में सक्रिय करने पर जोर दे।

कार्यकर्ता कांवड़ सेवा आदि में भी अपनी भागीदारी निभाएं। इस दौरान उन्होंने आह्वान किया कि कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को हिंदुत्व के लिए जागरूक करें। भारत में हिंदू जागरण तेजी से हो रहा है। हम उस देश से हैं, जिसमें हिंदुओं ने मुगलों के समय में भी हिंदुत्व का रास्ता बनाया था। इस दौरान बजरंग दल के जिला संयोजक राम कुमार आर्य सहित विश्व हिंदू परिषद के तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

टीकाराम मंदिर में की आरती
बैठक समापन के बाद कार्यकर्ताओं के सिर पर सेल्फी का क्रेज चढ़कर बोला। सभी कार्यकर्ताओं ने बड़ी उत्सुकता के साथ प्रवीन तोगड़िया के साथ सेल्फी ली। उसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान वह सरस्वती शिशु मंदिर में रुके। शाम को टीकाराम मंदिर मेें आरती के लिए पहुंचे, जहां से आरती के बाद शाम को कार्यकर्ताओं से वार्तालाप किया। उसके बाद विश्राम हुआ।   
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