उर्दू के प्रख्यात आलोचक, चिंतक एवं भाषाविद् प्रो. गोपी चंद्र नारंग ने कहा कि एएमयू भारत सरकार को एएमयू की विशिष्ट पहचान का लिहाज रखना चाहिए। अल्पसंख्यक स्वरूप पर उन्होंने कहा है कि एएमयू न केवल अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक विकास में मुख्य भूमिका निभाई है बल्कि भारत के बहुलवाद संस्कृति के विकास में भी मुख्य भूमिका निभाई है।
प्रो. नारंग ने कहा कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर एएमयू का मूल चरित्र है। इसके ऐतिहासिक, अल्पसंख्यक तथा राष्ट्रीय स्वरूप की अनदेखी नहीं की जा सकती। एएमयू ने साहित्यिक, पत्रकारिता, इतिहास, सूफीवाद तथा वैज्ञानिक शिक्षा के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है तथा देश के इतिहास में इसकी भूमिका स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।
यह संस्था सर सैयद अहमद खां के सपनों को साकार भी करती है। उल्लेखनीय है कि प्रो. नारंग को एएमयू द्वारा मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली में प्रो. एमरेटस हैं। इससे पूर्व वह जामियां में डीन तथा उर्दू विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रो. नारंग जामियां मिल्लिया इस्लामिया के कार्यवाहक कुलपति भी रह चुके हैं।