ताइक्वांडो शिविर में प्रशिक्षण लेते बच्चे।
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अमर उजाला अपराजिता के तहत धर्मपुर कोर्टयार्ड में बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। बालिकाओं ने डेमो करके खुद को सुरक्षित करने का तरीका भी सीखा।
बालिकाओं को हाथों और पैरों के सही उपयोग, अचानक होने वाले हमलों से बचाव, मानसिक सतर्कता और आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने के तरीकों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षक शालिनी चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में हर बालिका को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेना चाहिए, जिससे वह न केवल स्वयं की सुरक्षा कर सके, बल्कि समाज में निर्भीकता के साथ आगे बढ़ सके। ताइक्वांडो केवल एक खेल नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्म-सुरक्षा का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का ज्ञान लड़कियों के भीतर आत्मविश्वास पैदा करता है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने की शक्ति देता है। प्रशिक्षक राजीव चौहान ने कहा कि ताइक्वांडो शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती और अनुशासन का भी विकास करता है।