गांव बहरावद की गायत्री देवी ने विपरीत हालात को मात देकर सफल उद्यमी बनने की मिसाल पेश की है। वर्ष 2017 में बड़े बेटे प्रमोद के हार्ट का ऑपरेशन कराने में सात लाख रुपये खर्च होने के बाद परिवार कर्ज में डूब गया था। पति सोमवीर सिंह की खेती से घर चलाना भी मुश्किल था। बच्चों की पढ़ाई ठप होने की नौबत आ गई थी लेकिन गायत्री ने हिम्मत नहीं हारी और शहद के कारोबार से जिंदगी में मिठास भर दी।
गायत्री देवी ने बताया कि उन्होंने 2018 में महाशक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 25 हजार रुपये का लोन लिया और 20 डिब्बों से मधुमक्खी पालन शुरू किया। पति और बच्चों के सहयोग से कारोबार बढ़ता गया. आज उनके पास 150 डिब्बे हैं और सालाना टर्नओवर करीब पांच लाख रुपये है। गायत्री बताती हैं, पति से कहा था- चिंता मत करो, मेहनत करेंगे। खुद का कारोबार ही सबका सहारा बना। हौसला और मेहनत हो तो हालात कितने भी बुरे हों, मंजिल पाई जा सकती है। गायत्री देवी अब खेतों में खड़े यूकेलिप्टस, लीची, सरसों, बेर, जामुन और कीकड़ के फूलों से अलग-अलग किस्मों का शहद तैयार कर रही हैं। (संवाद)
बड़े होटलों तक पहुंचा ‘महाशक्ति’ ब्रांड
गायत्री का शहद अब डीलरों के जरिए सप्लाई होता है। कई बड़े होटलों में भी उनके सैंपल रखे हैं, जिन पर महाशक्ति स्वयं सहायता समूह बहरावद द्वारा निर्मित लिखा हुआ है। गायत्री कहती हैं, यह देखकर गर्व होता है। अब ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की तैयारी है।
बच्चों को पढ़ाया, बेटी का घर बसाया
कभी घर का खर्च चलाना मुश्किल था, आज बेटा प्रमोद बीकॉम और छोटा बेटा प्रवीन बीएससी कर रहा है। बेटी अंजलि ने एमएससी गणित व डिप्लोमा किया है। 11 मई को अंजलि की शादी अच्छे घर में धूमधाम से कर दी है।
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं महिलाएं : बीडीओ
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकार हर स्तर पर मदद कर रही है। जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को समूह से जुड़कर आगे आना चाहिए।- वेदप्रकाश, बीडीओ