स्वर्णजयंती नगर से सटी हुई दो अवैध कालोनियों वैशालीपुरम और चित्रांजलि को एक एचआईजी प्लाट से रास्ता देने का मामला गरमा गया है। रविवार को अवकाश के दिन यहां सड़क बनवाई गई। नौ मीटर चौड़ी और 19 मीटर लंबी इस सड़क का स्वर्णजयंती नगर के वाशिंदों ने जबरदस्त विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर हर कालोनी को स्वर्णजयंती नगर से ऐसे ही जोड़ा जाता रहा तो ये पूरा इलाका अनियोजित हो जाएगा।
फिर एडीए से प्लाट लेने का क्या फायदा होगा..? वहीं उक्त दोनों कालोनियों के निवासियों ने कहा कि वह रास्ते को लेकर परेशान हैं। लगातार प्रयास करने के बाद अब उनको रास्ता मिल रहा है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए। इस दौरान दोनों पक्षों के लोगों में कहासुनी भी हुई, जिससे ठेकेदार भी परेशान रहा। मौके पर पहुंची क्वार्सी पुलिस ने लोगों को समझाबुझा कर उनके घरों में भेजा। एडीए के अधिकारियों ने इस मामले में कई फोन करने के बाद भी स्थानीय लोगों से कोई बात नहीं की है।
गौर हो कि वर्ष 2003 में ही प्लाट संख्या 22 को संपर्क मार्ग में बदलने के लिए इसके आवंटी गवेंद्र कुमार यादव और एडीए के मध्य करार हो गया था। एडीए ने इस प्लाट को आवंटी से वापस लेकर रास्ता देने का मन बनाया। परंतु स्वर्णजयंती नगर कालोनी के लोगों के विरोध के कारण रास्ता नहीं बन सका। मामला अदालत भी पहुंचा। इसी क्रम में एडीए के अध्यक्ष मंडलायुक्त जीएस प्रियदर्शी ने उक्त दोनों अवैध कालोनी को रास्ता देने से इंकार कर इनका प्रत्यावेदन बीती 29 फरवरी को निरस्त कर दिया था।
इसके बाद भी रविवार को अवकाश के दिन ठेकेदार ने यहां प्लाट पर सीसी रोड बना कर दोनों कालोनियों का रास्ता बना दिया। इस रास्ते पर स्वर्णजयंती नगर के एमआईजी 33 के निवासी शरद कुमार ने इस मामले में मंडलायुक्त के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। इधर, वैशालीपुरम, चित्रांजलि के लोगों ने कहा है कि जब उनका मानचित्र पास हुआ है तो उनको संपर्क मार्ग मिलना चाहिए। कालोनी वासियों के आग्रह पर ही सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसकी मांग वह बीते कई वर्षों से कर रहे हैं। उन लोगों ने नियमानुसार सभी तरह के कर चुकाए हैं अब उन्हें भी रास्ते का हक है।