आगरा खंड स्नातक चुनाव में नवनिर्वाचित डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सर सैयद अहमद खां तो एएमयू को ऑक्सफोर्ड बनाना चाहते थे। लेकिन एएमयू के ही कुछ लोग इसे मदरसा दारुल उलूम देववंद बनाना चाहते हैं। एएमयू का मामला उच्च सदन में उठाएंगे और एएमयू को वास्तविक पहचान दिलाने की कोशिश करेंगे।
डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह छात्र जीवन से एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप पर सवाल उठाते आ रहे हैं। इसी सिलसिले में एएमयू बचाओ मंच का गठन किया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राजनीति के दौरान एएमयू के मुद्दों को प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। सुरेंद्रनगर स्थित अपने आवास पर अमर उजाला से बातचीत के दौरान डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मन्नान वानी, अफजल गुरु की मौत पर नमाज-ए-जनाजा, देश विरोधी नारे सुनकर दिल में तकलीफ होती है। इससे एएमयू की छवि खराब होती है। बड़ी चालाकी से छात्र एवं अमुटा के कुछ लोग मन्नान वानी जैसे लोगों को समर्थन देते हैं।
डॉ. मानवेंद्र कहते हैं कि एएमयू एवं देववंद में फर्क दिखना चाहिए, सर सैयद भी यही चाहते थे। कुछ लोग इसकी छवि मदरसा जैसा बना देना चाहते हैं। जबकि यह डीयू, बीएचयू की तरह केंद्रीय विश्वविद्यालय है और केंद्र के पैसे से संचालित होता है, जो लोग अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए कुछ करना चाहते हैं, वह एक अलग यूनिवर्सिटी बना लें। लेकिन एएमयू को मदरसा दारुल उलूम न बनाएं। मेरी कोशिश होगी कि यहां से वैज्ञानिक, नाभिकीय वैज्ञानिक, स्कॉलर निकलें, जो पूरी दुनिया में अलीगढ़ का नाम रोशन करें। यहां की शिक्षा व्यवस्था से प्रभावित होकर दुनिया की बेहतरीन कंपनियां प्लेसमेंट के लिए अलीगढ़ आए। इस दिशा में एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को भी कोशिश करनी चाहिए।