हेलमेट जोन में एक साहब यह सोचकर आगे बढ़ लिए कि कोई नहीं, रोकने वाले तो अपने ही आदमी है।
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अजीब दास्तां है अपनी पुलिस की। अपने को पकड़ती नहीं और गैरों को छोड़ती नहीं है। कुछ ऐसा ही नजारा कठपुला पर रोजाना देखने को मिल रहा है। जब पुलिस ने इस पुल को हेलमेट जोन बनाया है, तब से कुछ न कुछ नए किस्से रोज जरूर सुनने को मिल रहे हैं।
कहा गया था कि अगर इस पुल पर हेलमेट जोन का प्रयोग सफल रहा, तो दूसरे पुलों पर इसे लागू किया जाएगा, लेकिन पहले ही प्रयोग में पुलिस अपने और गैरों के मकड़जाल में उलझ गई है। दो दिन तक पहले बाइकर्स को हेलमेट लगाकर चलने की चेतावनी दी गई।
तीसरे दिन से तीन सौ रुपये का चालान कटना शुरू हो गया। पुल के दोनों ओर पुलिस कर्मियों की तैनाती है। बिना हेलमेट के बाइक सवार से 300 रुपये बतौर जुर्माना वसूले जाते हैं। मगर, कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हाथ हिलाकर या किसी से फोन पर बात कराकर चलते बनते हैं।
खैर, सुखद ये भी है कि पहले के मुकाबले हेलमेट सवार ज्यादा दिखने लगे हैं। न्यूरो सर्जन डॉ. नागेश वार्ष्णेय ने बताया कि सड़क हादसे में सबसे गंभीर चोट सिर की होती है। कभी तो जानलेवा तक साबित हो जाती है, इसलिए हेलमेट का इस्तेमाल जरूरी है। उधर, हेलमेट का बाजार भी गरम हो गया है।