पीपीपी से निर्मल होगी गंगा
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। देश की नदियों की पवित्रता एवं स्वच्छता बनाए रखने के लिए नए कंसेप्ट पर मंथन चल रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही हाईवे की तरह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) से गंगा की निर्मलता बनाए रखने के लिए कंपनियों से समझौता होगा। नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित ‘वाटर एक्सपर्ट सेशन, यूपी गंगेज प्रोजेक्ट’ में ऐसा सुझाव अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नदीम खलील ने दी। देश के ही नहीं बल्कि हालैंड से आए विशेषज्ञों ने भी उनके प्रजेंटेशन की सराहना की।
एएमयू के डॉ. नदीम खलील ने यमुना की सफाई के लिए मथुरा एवं वृंदावन पर अपना प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि यमुना एक्शन प्लान फेज 1 वर्ष 2002 में जापानी सहायता से शुरू हुआ था। वहां पर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था जिसकी क्षमता 56 एमएलडी पानी साफ करने की थी। अब वह प्लांट काफी पुराना पड़ चुका है। 2002 की तुलना में जनसंख्या भी काफी बढ़ गयी है। अब वहां पर करीब 250 करोड़ की लागत से नए आधुनिक प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 95 एमएलडी होगा। नए आधुनिक प्लांट लगने से पानी साफ करने की क्षमता करीब 39 एमएलडी बढ़ जाएगी। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि पानी के क्षेत्र में नए कंसेप्ट पर विचार चल रहा है। हाईवे की तरह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की योजना है। 30 साल के लिए सरकार टेंडर हासिल करने वाली कंपनी से समझौता करेगी। पानी की सफाई के लिए कंपनी पैसे लेगी और समझौते की अवधि तक उसका रखरखाव भी करेगी। केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गयी तो इस योजना पर जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। डॉ. नदीम खलील ने बताया कि इसमें एएमयू की भूमिका सिर्फ तकनीकी सलाहकार की होगी।