सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि आज राजनीति को भी गंगा की तरह साफ करने की जरूरत है और ऐसा तभी होगा जब देश की राजनीति में युवाओं की सहभागिता बढ़ेगी।
राज्यपाल मंगलवार को यहां मंगलायतन विश्वविद्यालय में ‘युवा भारत की चुनौतियां’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे।
उन्होंने छात्रों से कहा कि गंगा पवित्र नदी है। इस देश में हजारों बरसों से लोग मृत्यु के समय गंगा जल पिलाते हैं। इसके पीछे धारणा है कि इससे आदमी को मुक्ति मिल जाती है। लेकिन वही गंगा आज इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि बनारस का पानी आचमन लायक नहीं है।
गंगा की तरह आज राजनीति भी प्रदूषित (जातिवाद व भाषावाद) हो गई है। उन्होंने कहा कि राजनीति देश चलाने के लिए महत्वपूर्ण औजार है। अच्छे युवक इसमें नहीं आएंगे तो वैसे लोग आ जाएंगे जिन्हें नहीं आना चाहिए।
उन्होंने छात्रों से कहा कि आज दुनिया बहुत छोटी होती जा रही है। आपकी स्पर्धा अलीगढ़, उत्तर प्रदेश या भारत से नहीं बल्कि दुनिया के छात्रों से है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि दुनिया के साथ और दुनिया से आगे कैसे चलें।
उन्होंने 20-25 साल पहले भारतीय युवाओं के विदेश जाने (ब्रेन ड्रेन) की याद दिलाते हुए कहा कि अमेरिका और इंग्लैंडमें भारतीय युवाओं ने इंजीनियरिंग एवं मेडिकल के क्षेत्र में अपनी बुद्धि एवं पराक्रम की चमक दिखाई। उसके बाद आईटी क्षेत्र में प्रगति की।
इसकी वजह से अमेरिका में समस्या खड़ी हुई कि वहां के लड़कों को कामकैसे मिलेगा। अब अमेरिका का काम भारत में बैठकर हो रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे पास जो प्रतिभा एवं संपन्नता है, उसे सही दिशा में ले जाना जरूरी है। फिर हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवा देश बन जाएगा। यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। यदि इस पूंजी का सार्थक उपयोग नहीं किया गया तो यही आतंकवादी बनकर विनाश की बात करने लगेंगे। इस पर विचार करने की जरूरत है।
आज के युवाओं के कंधों पर स्वराज्य को सुराज्य में परिवर्तित करने की महती जिम्मेदारी है। इससे पूर्व राज्यपाल का परिचय यूनिवर्सिटी के विजिटर डॉ. अच्युतानंद मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के चेयरमैन पवन जैन ने किया। यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति पद्मश्री गोपालदास नीरज, स्वप्निल जैन, कुलपति प्रो. एससी जैन, सह कुलपति ब्रिगेडियर पीएस सिवाच आदि ने राज्यपाल का स्वागत किया।