ये लोग घूम घूमकर अपने संपर्कों के जरिये ऐसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं, जिनकी शादी नहीं हुई। बाद में वहां अपनी पत्नियों में से ही किसी को दिखाकर पसंद कराते हैं और कोई भाई बनता है तो कोई भाभी बनता है। फिर जेवरात लेकर दुल्हन गायब होती है, जिसे आपस में बांटते हैं। क्वार्सी में दिनेश के साथ अनम की शादी कराई गई थी, जबकि मानव के साथ पूजा की शादी कराई गई थी। अब तक इन्होंने यूपी, राजस्थान हरियाणा आदि में एक दर्जन इस तरह की वारदात कर रखी हैं। पूर्व में जवां में भी एक मुकदमा इन लोगों पर दर्ज हुआ था।
फर्जी आधार के सहारे चलता गैंग
क्वार्सी थाने में प्रेसवार्ता करते हुए सीओ तृतीय-एएसपी अमृत जैन व इंस्पेक्टर क्वार्सी ने बताया कि यह लोग नाम बदलकर सामने आते हैं। आधार कार्ड में फर्जीवाड़ा कर अपने पते आदि बताते हैं। एक मोबाइल नंबर व एक आधार कार्ड को सिर्फ एक बार ही प्रयोग करते हैं। ग्राहक पटने पर सभी रीति रिवाजों के साथ शादी की जाती है। दो से तीन दिन में महिलाएं अपना खेल कर निकल जाती हैं। इनके द्वारा की गईं अन्य घटनाओं का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है। गिरोह के अन्य सदस्यों के विषय में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
सुहागरात की रात करती थीं बेहोश
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकारा कि वे खाने पीने की वस्तुओं में नशे की गोलियां मिलाकर दूल्हे को को बेहोश करती थीं। ताकि वह संबंध न बना पाए। जरूरत पड़ने पर परिवार के अन्य सदस्यों को भी बेहोश कर देती थीं। इस पूरे गिरोह में छह लोग आपस में पति-पत्नी हैं। इनमें से एक महिला पूजा रांची की मूल निवासी है। एक मेरठ की है।
टिर्री चालक महिला से दोस्ती में बना गैंग
पुलिस पूछताछ में प्रदीप ने स्वीकारा है कि पुष्पा की मुलाकात उससे टिर्री चलाने के दौरान हुई। वह टिर्री चालक पुष्पा की टिर्री में सवार होकर एक दिन जा रहा था। तभी उससे बातों में दोस्ती हो गई। इसी दौरान बातचीत में पूरा गैंग तैयार किया गया।