चुनावी मौसम में अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी (एएमयू) निशाने पर है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पत्रिका ऑर्गनाइजर के ताजा अंक (5 फरवरी, 2017) में एक लेख प्रकाशित होने के बाद एएमयू में खलबली मच गई है। इसके साथ ही नई बहस भी शुरू हो गई है।
बीबीसी के पत्रकार रह चुके ओपेन इंस्टीट्यूट नई दिल्ली के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर तुफैल अहमद ने मैगजीन में प्रकाशित अपने लेख में एएमयू के थियोलॉजी (धर्मशास्त्र/सुन्नी थियोलॉजी एवं शिया थियोलॉजी) विभाग का फंड काटकर आरएसएस के संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच को देने की वकालत की है ताकि उससे मुस्लिम बहुल शहरों में मुस्लिम युवाओं के बीच मैथमेटिक्स ओलंपियाड का आयोजन हो सकें।
भारत में इस्लामिक सुधार से संबंधित अपने लेख में तुफैल ने यह भी कहा है कि सर सैयद अहमद खां ने साइंटिफिक सोसाइटी की स्थापना के साथ-साथ तहजीब उल अखलाक मैगजीन प्रकाशित की, जिसका उद्देश्य मुसलमानों में साइंटिफिक टेंपर विकसित करना था। लेकिन आज तहजीब उल अखलाक एवं एएमयू अपने उद्देश्यों को पूरा करने में पूरी तरफ विफल हैं।
मैगजीन में लेख प्रकाशित होने के बाद एएमयू में विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के कार्यक्रम में एएमयू के बुद्धिजीवी शामिल होते रहे हैं। मंच की रोजा इफ्तार पार्टी के अतिरिक्त दूसरे कार्यक्रमों में एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह, विधि विभाग के पूर्व डीन प्रो. एम शब्बीर, थियोलॉजी विभाग के डॉ. मुफ्ती जाहिद ए खान समेत कई बुद्धिजीवी शामिल होते रहे हैं।