डॉ. बुशरा। स्रोत : स्वयं
उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली आईपीएस अधिकारी डॉ. बुशरा बानो की प्रेरणादायक सफलता की कहानी अब छात्राओं को पढ़ाई जाएगी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से उच्च शिक्षा प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा तक पहुंचने वाली डॉ. बुशरा का संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
डॉ. बुशरा बानो बचपन से ही मेधावी छात्रा रहीं। उन्होंने 22 वर्ष की उम्र से पहले ही एमबीए की डिग्री हासिल कर ली थी। इसके बाद एएमयू से उन्होंने पहले ही प्रयास में नेट-जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की और रिकॉर्ड समय में मैनेजमेंट विषय में पीएचडी पूरी की। उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने सऊदी अरब में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दीं, लेकिन देश सेवा की भावना उन्हें वापस भारत ले आई।
आईपीएस बनने का उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा। पारिवारिक जिम्मेदारियों, दो छोटे बच्चों की परवरिश और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। वर्ष 2018 में गर्भावस्था के अंतिम चरण में रहते हुए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय रेलवे यातायात सेवा में स्थान प्राप्त किया। इसी दौरान यूपी पीसीएस परीक्षा में छठी रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
फिरोजाबाद सदर में एसडीएम के रूप में तैनाती के दौरान अवैध खनन के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी परीक्षा दी और अखिल भारतीय स्तर पर 234वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होकर अपने सपने को साकार किया।
एएमयू के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर राहत अबरार ने बताया कि अब एएमयू में छात्राओं को डॉ. बुशरा के संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज आईपीएस अधिकारी के रूप में डॉ. बुशरा बानो महिला सशक्तीकरण का चमकता हुआ चेहरा हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां या शारीरिक चुनौतियां सफलता की राह में बाधा नहीं, बल्कि संघर्ष को और मजबूत बनाने वाली सीढ़ियां होती हैं।