जब उन्होंने अपनी मुनाफे की रकम मांगी तो उन्हें यह कहा गया कि आप पहले चालीस फीसदी कर के रुपये जमा कराओ, तब मुनाफा मिलेगा। इसका जिक्र उन्होंने परिवार में किया, तब उन्हें खुद के साथ 52.50 लाख की ठगी का अहसास हुआ। इस तरह उनके विदेशी नौकरी के फंड की रकम ठगी में चली गई। बाद में उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत की। इसके बाद बृहस्पतिवार को साइबर थाने में अज्ञात हैकरों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस तरह की ठगी को लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। फिर भी लोग झांसे या उनकी बातों में फंसकर ठग जा रहे हैं। ऐसे मामलों में लगातार मुकदमे व रकम वापसी पर टीमें काम कर रही हैं।-संजीव सुमन, एसएसपी
इस मामले में साइबर पोर्टल पर हुई शिकायत के बाद साइबर टीम ने जांच शुरू की। जिसमें पहले चार खातों की जांच में पता चला कि मनी ट्रेल में कुल 36 खातों में पैसा भेजा गया। इसमें से पुलिस ने डेढ़ लाख रुपये होल्ड कराए हैं। बाकी टीम आगे रकम कहां तक गई है, टीम इसकी जांच में जुटी है।
इस ठगी के ये हैं छह चरण
1-शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप में निवेश एकेडमी और टीचर्स सर्विस टीम से जोड़ते हैं।
2-ग्रुप में लिंक भेजकर लोगों से शेयर ट्रेडिंग एप डाउनलोड करवाते हैं, जो खुद ठग गैंग द्वारा बनाया गया है।
3-शेयर ट्रेडिंग एप पर निवेशक का रजिस्ट्रेशन कराते हैं और उसके नाम पर रकम भी ली जाती है।
4-झांसे में आए निवेशक से अलग अलग चालू बैंक खातों में शुरुआत में कम रकम जमा कराई जाती है।
5-एप में मुनाफे की रकम बढ़ती देख निवेशक खुश होता है और फिर मोटी रकम लगाने में फंस जाता है।
6-निवेशक जब रकम वापस मांगता है तो कर के नाम पर रकम जमा कराने का दबाव बनाते हैं, तभी वह समझता है।
विदेश में बैठे इस ठगी के मास्टर माइंड
शेयर ट्रेडिंग मेंं मुनाफे के नाम पर साइबर ठगी इन दिनों चलन में है। यहां के साइबर थाने में अब तक सबसे ज्यादा मुकदमे इसी ठगी के दर्ज हुए हैं। इन अपराध में अब तक जो भी खुलासे हुए हैं या पुलिस किसी नतीजे पर पहुंची है तो उसमें इतना ही पता चल सका है कि जिसके खाते में रकम गई, वह एक से दो फीसदी कमीशन पर काम कर रहा था। उसे सिर्फ अपना खाता किराये पर देना था। ठगी की रकम उसके खाते में आई और कुछ ही देर में आगे अन्य खातों में ट्रांसफर हो गई। यह रकम किराये के इस खाते में आती लाखों में है। मगर विदेश में बैठे लोग उसे छोटे छोटे टुकड़ों में आगे ट्रांसफर करते हैं। तीसरी-चौथी लेयर में ट्रांसफर होने के बाद यह रकम विदेश में एटीएम के जरिये या ऑनलाइन खरीद के जरिये निकाल ली जाती है। अब तक अलीगढ़ सहित अलग अलग जिलों में हुए खुलासे में ये हैकिंग दुबई, कंबोडिया आदि मुल्कों से बैठकर हो रही है।